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बांसवाड़ा में स्वाइन फ्लू का कहर, 31 को लिया आगोश में, 7 की मौत

पिछले वर्ष नहीं था एक भी रोगी, इस वर्ष रोगियों की संख्या पहुंची 31, प्रदेश में 2861 रोगी मिले स्वाइन फ्लू के, 212 मौतें

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बांसवाड़ा. प्रदेश के साथ ही इस वर्ष स्वाइन फ्लू ने जिले में भी खूब कहर बरपाया है। पिछले वर्ष जहां एक भी रोगी नहीं था, वहीं इस वर्ष ३१ लोगों में स्वाइन फ्लू संक्रमण की पुष्टि हुई। जिसमें 7 लोगों की मौत हो चुकी है। दूसरी ओर प्रदेश में यह आंकड़ा और भी चौकानें वाला है। जहां ३३ जिलों में रोगियों की संख्या २८६१ पहुंच चुकी है। जबकि 212 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद जिले में स्वाइन फ्लू के उपचार के लिए उचित प्रबंध तक नहीं है। जिस कारण लोगों को गुजरात या उदयपुर जाना पड़ता है।

स्वाइन फ्लू को लेकर सबसे चौकाने वाली बात यह है कि जिले में इसकी रोकथाम के लिए उचित प्रबंध तक नहीं है या यूं कहे की जिले में स्वाइन फ्लू की रोकथाम चिकित्सा महकमे के बूते की बात ही नहीं रही। जिसके कारण अधिकांश मरीजों को उदयपुर रैफर कर दिया जाता है।

वास्तविकता तो यह है कि पूरे जिले में सिर्फ महात्मा गांधी अस्पताल में ही स्वाइन फ्लू के उपचार की व्यवस्था की गई है। लेकिन यहां भी उपचार को लेकर मानो खिलवाड़ किया जा रहा है। उपचार के लिए छोटे-छोटे दो कमरों को वार्ड का रूप दे दिया गया। इन कमरों में तीन-तीन बेड डाल दिए गए। जिसके बाद यहां दो लोग भी इत्मिनान से खड़े तक नहीं हो सकते। और तो और कमरों में उचित प्रबंध तक नही किए गए। जिस कारण मरीजों को गर्मी लगने पर बाहर आकर बैठना पड़ता है, तीमारदार दिन हो या रात सडक़ों पर टहलते नजर आते हैं।

पूरे संभाग में एक दिन में सिर्फ 24 जांचे

पूरे उदयपुर संभाग के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, राजसमंद और चित्तौडग़ढ़ जिले में कहीं पर भी स्वाइन फ्लू की जांच की व्यवस्था नहीं है। रोगी के सैंपल की जांच की सुविधा उदयपुर के रवींद्रनाथ टैगोर राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय में है। यहां पर भी मशीन में एक दिन में सिर्फ २४ सैंपल की ही जांच हो पाती है। जांच और उपचार के पर्याप्त संसाधन न होने के कारण मरीजों को खासी दिक्कत उठानी पड़ती है।

विभाग का तर्क

01. गाइड लाइन के अनुसार रोगी को प्राथमिक स्तर पर नमूना जांच की आवश्यकता नहीं होती, उसे टेमीफ्लू खिलाकर भेज दिया जाता है और रोगी की गिनती ओपीडी में होती है।

02. द्वितीय स्टेज के मरीजों के नमूने लेने होते हैं।

03. तीसरे स्तर के मरीजों की हालत को देख अनुभव के आधार पर पहले दिन उपचार शुरू करते हैं। यानी चिकित्सकों को रोगी की हालत से रेागी की बीमारी का पता चल जाता है।

स्वाइन फ्लू मरीजों की स्थिति

बांसवाड़ा :
सैंपल : रोगी : मौत
५९:३१:०७


---प्रदेश------
सैंपल:रोगी: मौत
८८४४:२८६१:२१२