
पत्रिका फाइल फोटो
Rajasthan Politics: पंचायती राज और निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के बीच बांसवाड़ा जिला कांग्रेस में अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिल रही है। गढ़ी प्रधान और पूर्व विधायक कांता भील वर्तमान में कांग्रेस से निलंबित हैं, लेकिन इसी परिवार में उनके बेटे शाश्वत गरासिया ऊर्फ भय्यू जिले में युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बनाए गए और अब उनकी बेटी प्रज्ञा गरासिया को महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष की कमान सौंप दी गई है।
एक ही परिवार से दो-दो जिलाध्यक्ष बनने से संगठन में अंदरूनी भूचाल आ गया है। हालांकि पहले विरोध करते रहे नेता चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि इस परिवार के कट्टर समर्थक रहे कार्यकर्ता व पदाधिकारी भी दबे स्वर में सवाल उठाने लगे हैं। पार्टी पदाधिकारियों तक यह बात खुलकर पहुंच गई है कि स्थानीय स्तर पर यह नियुक्ति आमजन के बीच गलत संदेश दे रही है।
एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने टिप्पणी की, अगर पार्टी को फजीहत से बचाना था तो कांता भील का निष्कासन ही वापस ले लेते। इससे संगठन की साख बनी रहती, लेकिन वर्तमान निर्णय से कांग्रेस ने खुद अपनी छवि और निर्णय क्षमता पर सवाल खड़ा कर दिया है।
स्थानीय नेताओं का कहना है कि चुनाव से पहले और भी कई बड़े चेहरे पार्टी में लौट सकते हैं। संगठन जिलास्तर पर कुछ फेरबदल की तैयारी में है। इस बार कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने के मूड में है, लिहाजा उसका मुकाबला भाजपा के साथ-साथ भारत आदिवासी पार्टी से भी होगा। पार्टी रणनीतिक तौर पर हर तीर तरकश में रखना चाहती है। यदि ऐसा हुआ तो वागड़ में कांग्रेस की सियासी जंग और दिलचस्प हो जाएगी।
कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके अरविंद डामोर की आधिकारिक घर वापसी भी जिले की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने 25 सितंबर को आदेश जारी कर डामोर समेत छह नेताओं को घर में एन्ट्री दे दी है। डामोर को पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने टिकट दिया था, लेकिन बीएपी के समर्थन में टिकट वापस लेने को कहा गया, लेकिन अरविंद डामोर ने इससे इनकार कर दिया था।
परिणामस्वरूप पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। इसके बावजूद वह लगातार पार्टी कार्यालय से जुड़े रहे। अब उनकी वापसी से कांग्रेस खेमे में नए समीकरण बनने की अटकलें तेज हो गई हैं।
Published on:
29 Sept 2025 03:34 pm
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