
पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की ऐसी सफलता, यहां तो भूत-प्रेतों के लिए भी बन गए शौचालय
बाराबंकी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने में लगे हुए हैं। इस अभियान में ये संदेश दिया जाता है कि शौच के लिए बाहर न जाकर अपने शौचालय में जाएं, इससे देश भी स्वच्छ बनेगा और लोगों को बीमारियां भी कम होंगी। प्रधानमंत्री की इस अपील का अब ऐसा असर पूरे देश में दिख रहा है, जो आपको चौंका सकता है। दरअसल उनके इस अभियान में जहां देश के नागरिक बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं तो वहीं भूत-प्रेत भी अब शौच के लिए बाहर न जाकर अपने शौचालय में जा रहे हैं। जी हां, ये अनोखा कारनामा हुआ है बाराबंकी जिले में।
भूतों के लिए भी बन गए शौचालय
दरअसल बाराबंकी जिले में अधिकारियों ने शौचालय बनाने के नाम पर बड़ा कारमाना कर दिखाया है। अधिकारियों ने जिंदा इंसानो के नाम पर तो शौचालय बनाए हैं साथ ही उन लोगों को भी शौचालय दिए जो इस दुनिया में हैं ही नहीं। इनको सिर्फ शौचालय की पात्रता सूची में ही नहीं रखा गया बल्कि इनके नाम पर शौचालय का पैसा भी निकाल लिया गया। खास बात यह है कि शौचालय उन लोगों भी दिया गया जो सरकारी सेवा में हैं और इसके पात्र हैं ही नहीं। जबकि उन लोगों को शौचालय दिया ही नहीं गया जो वास्तव में इसके पात्र हैं। इससे साफ है कि बाराबंकी के अधिकारी प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान पर पूरी तरह से पलीता लगाने में जुटे हुए हैं।
कुरौली गांव का मामला
ये पूरा मामला है बाराबंकी जनपद के ग्राम कुरौली की, जहां प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांव में शौचालय निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। मगर यहां अधिकारियों का कमाई वाला खेल भी सामने आ गया है। यहां शौचालय निर्माण के लिए सरकारी पात्रता सूची में उन लोगों के नाम जोड़े गए हैं, जो इसके पात्र हैं ही नहीं। कई साधन सम्पन्न सरकारी कर्मचारियों के नाम भी पात्रता सूची में हैं और उनके नाम पर शौचालय का पैसा भी निकाल लिया गया।
और कितना सफल होगा अभियान
सरकारी कर्मचारियों को शौचालय का पैसा मिलने की सूचना जब मीडिया को मिली तब हम इसकी वास्तविकता की जांच के लिए कुरौली गांव पहुंचे। यहां पहुंच कर हमारे होश यह सुनकर उड़ गए कि यहां भूत-प्रेतों को भी शौचालय दे दिए गए हैं और उसका पैसा भी निकल लिया है। यह सब देख कर मन यह सोचने को मजबूर हो गया कि क्या मोदी राज में भूत-प्रेत भी शौच के लिए बाहर न जाकर अपने शौचालय में जा रहे हैं। यह सब देख कर हम कह सकते हैं कि यह अभियान अब और कितना सफल होगा, जब भूत भी शौचालय में जाने लगे हैं।
अपने खर्च से बनवाया शौचालय
इस गांव में ऐसे लोग भी मिले जिन्होंने अपने खर्च पर शौचालय का निर्माण करवाया है। मगर पात्रता सूची में उनका भी नाम है। लेकिन इस बारे में उन्हें जानकारी ही नहीं है। कुछ सरकारी अधिकारियों के नाम भी पात्रता सूची में हैं। इस सूची में शामिल एक न्यायाधीश का नाम भी है। जब उनके घर वालों से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस बारे में जानकारी से ही इनकार कर दिया। उन लोगों ने बताया कि उनके यहां जो शौचालय है वह उनके अपने खर्च पर बनवाया गया है। अब अधिकारियों ने कैसे क्या खेल किया है इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
ग्राम प्रधान को नहीं कुछ पता
200 से ज्यादा शौचालय निर्माण में धांधली की खबर के बारे में जब हमने ग्राम प्रधान से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि 200 नहीं बल्कि 50 शौचालय के निर्माण का पैसा आया था, जो बनवा दिए गए हैं। सूची में गड़बड़ी के बारे में जब प्रधान से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि कमी कहां से है यह उन्हें नहीं पता या कौन कर रहा है यह भी उन्हें नही पता। इस गांव में वह लोग भी हमें मिले जो वास्तव में इसके हकदार हैं। मगर उन्हें सूची में स्थान नहीं मिला। मतलब साफ है कि शौचालय निर्माण की पात्रता सूची में पहुंच वालों और उन लोगों का ध्यान रखा गया है जिनके नाम पर इसकी रकम अधिकारियों की जेबों में पहुंच सके।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
शौचालय निर्माण में हुई इस धांधली के बारे में जब हमने बाराबंकी की मुख्य विकास अधिकारी अंजनी कुमार सिंह से जब बात की तो उन्होंने बताया कि अभी तक ऐसा मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है और पात्रता सूची की जांच के लिए कमेटी भी बनाई जाती है। लेकिन अगर ऐसी कोई गड़बड़ी हुई है तो जांच करवा कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
20 Dec 2017 01:09 pm
