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मदरसे और स्कूलों का हैरान करने वाला सच, नहीं आता राष्ट्रगान…तो कइयों को नहीं पता आज के दिन का मतलब

लाखों रुपए की सैलरी पा रहे ये शिक्षक बच्चों को क्या तालीम दे रहे होंगे...

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Government school condition on Independence day 2018 Barabanki News

मदरसे और स्कूलों का हैरान करने वाला सच, नहीं आता राष्ट्रगान...तो कइयों को नहीं पता आज के दिन का मतलब

बाराबंकी. देश आज अपना 72 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। स्कूल, सरकारी ऑफिस, प्राइवेट संस्थानों के साथ जिले भर में लोगों ने झंडा रोहड़ के बाद राष्ट्रगान के साथ ही जश्न-ए-आजादी मनाई। लेकिन इस दौरान बाराबंकी जिले में कई सरकारी स्कूल और मदरसे ऐसे मिले में जहां तिरंगा तो फहराया गया लेकिन वहां तालीम दे रहे शिक्षकों को आज के दिन का मतलब ही नहीं पता। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि लाखों रुपए की सैलरी पा रहे ये शिक्षक बच्चों को क्या तालीम दे रहे होंगे।

नहीं पता स्वतंत्रता दिलस का मतलब

उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को लेकर काफी गंभीर है, इसके बावजूद तमाम स्कूलों और मदरसों से जो तस्वीरें सामने आई हैं वह बेहद चिंताजनक हैं। आज एक तरफ जहां पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा है तो वहीं जिले के कई मदरसों और सरकारी स्कूलों की हालत बद्तर है। यहां पढ़ा रहे शिक्षक और मौलाना ऐसे हैं जो इस देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने में जुटे हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब हम इन मदरसों और स्कूलों पर गए तो वहां की तस्वीर हैरान करने वाली थी। क्योंकि यहां तिरंगा तो फहराया गया लेकिन शिक्षकों और मौलानाओं को स्वतंत्रता दिवस का असल मतलब ही नहीं पता। और तो और इनमें से कई ऐसे हैं जिन्हें राष्ट्रगान तक नहीं आता। इनमें से कई मदरसों में मौलानाओं ने राष्ट्रगीत राष्ट्र गीत वंदे मातरम भी गाने से इनकार कर दिया।

लाखों की सैलरी के बाद ये हाल

सबसे पहले बाद जैदपुर के मदरसों की। सरकारी मदरसा जामिया अरबिया इमदाददुल की हालत ये है कि यहां तालीम देने के लिए कुल 26 मौलाना हैं, जिनकी तनख्वाह अगर जोड़ी जाए तो 14 लाख के करीब होगी। लेकिन यहां तालीम दे रहे मौलानाओं से जब हमने राष्ट्रगान गाने के लिए कहा तो उऩके चेहरे के रंग उड़ गए।उनके पसीने छूट गए लेकिन वह सही राष्ट्रगान नहीं सुना पाए। कमोबेश यही हाल मदरसा जामिया अरबिया नुरुल उलूम, मदरसा निस्वा नुरुल उलूम का भी मिला। यहां भी कहने को तमाम मौलाना तालीम देने के लिए मोटी सरकारी तनख्वाह पा रहे हैं लेकिन इनमें से कोई राष्ट्रगान नहीं गा पया। कुछ ने तो साफ कह दिया कि उन्हें आता ही नहीं। वहीं इनमें से कुछ लोगों से जब हमने राष्ट्रगीत वंदे मातरम गाने के लिए कहा तो इन लोगों ने साफ इनकार कर दिया और कहा के ये हम लोग नहीं गा सकते। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि ये मदरसे में तालीम ले रहे बच्चों को क्या सिखाते होंगे।

सरकारी स्कूलों का भी यही हाल

वहीं इसके बाद हम जिले के सनातन धर्म संस्कृति उत्तर माध्यमिक विद्यालय बाराबंकी पहुंचे। इस संस्कृत विद्यालय में आने पर हमें विश्वास था कि यहां के शिक्षक और बच्चों को राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और स्वतंत्रता दिवस की पूरी जानकारी होगी। लेकिन जब हमने यहां पढ़ा रही शिक्षिका अनीता तिवारी से स्वतंत्रता दिवस को लेकर आसान से सवाल पूछे तो ये अपनी बगलें झांकने लगीं। इस संस्कृत विद्यालय में भी चार शिक्षक नियुक्त हैं और इनकी भी सैलरी दो लाख के करीब है। लेकिन ये शिक्षक यहां पढ़ने वाले बच्चों के साथ सिर्फ खिलवाड़ ही नहीं कर रहे बल्कि सरकारी धन की भी बर्बादी करवा रहे हैं।