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लॉकडाउन के चलते बाराबंकी में फंसे कश्मीर के 34 मजदूर, एक की पत्नी की हुई मौत, फिर भी नहीं जा पा रहा घर

यह दर्द भरी दास्तान है बाराबंकी के विकासखंड देवा इलाके के पवैयाबाद गांव में बने चिनहट कोल्ड स्टोरेज की...

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लॉकडाउन के चलते बाराबंकी में फंसे कश्मीर के 34 मजदूर, एक की पत्नी की हुई मौत, फिर भी नहीं जा पा रहे घर

लॉकडाउन के चलते बाराबंकी में फंसे कश्मीर के 34 मजदूर, एक की पत्नी की हुई मौत, फिर भी नहीं जा पा रहे घर

बाराबंकी. पूरे विश्व में कोरोना जैसी महामारी का प्रकोप जारी है और कई सामर्थ्यवान देश भी असहाय हो चुके हैं। भारत सरकार ने देशभर में लॉक डाउन करके इस महामारी को देश में पैर फैलाने से काफी हद तक रोक दिया है। मगर इस लॉक डाउन के बाद कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो दिल को झकझोर दे रही हैं। ऐसी ही दिल झकझोरने वाली तस्वीरें सामने आई हैं बाराबंकी से, जहां कश्मीर से रोजी रोटी कमाने आये 34 मजदूर लॉकडाउन के चलते यहीं फंस गए। इन मजदूरों ने बताया कि वह अपने बच्चों के पास जाना चाहते हैं। एक मजदूर ने तो यहां तक बताया कि उसकी पत्नी की मौत हो गयी है और उसके बच्चे अकेले हैं। यहां फंसे सभी मजदूरों की एक दर्द भरी दास्तान है। हालाकि जिला प्रशासन, इनके मालिक और स्वयंसेवी संस्थाएं इनके खाने-पीने का प्रबंध कर रही हैं।

चिनहट कोल्ड स्टोरेज का मामला

यह दर्द भरी दास्तान है बाराबंकी के विकासखंड देवा इलाके के पवैयाबाद गांव में बने चिनहट कोल्ड स्टोरेज की। यहां कश्मीर से आये 34 मजदूर लॉक डाउन होने की वजह से फंस गए हैं और यह किसी तरह अपने घर जाना चाहते हैं। यह तस्वीर तब और भी हृदय विदारक हो जाती है, जब वह अपनी दर्द भरी कहानी अपनी जुबानी बयां करते हैं। यहां खाने-पीने की सुख सुविधा होने के बावजूद इन्हें अपने घर की और अपने परिवार की याद सता रही है।

एक मजदूर की पत्नी की हुई मौत

इन्हीं में से एक मजदूर ने बताया कि उसके चार छोटे-छोटे बच्चे हैं और यहां फंस जाने के बाद उसकी पत्नी की असामयिक मृत्यु हो गयी है। वह अपने बच्चों के पास जाना चाह रहा है और इस दुख की घड़ी में भी वह लॉकडाउन की वजह से अपने बच्चों के पास नही पहुंच पा रहा है। बच्चे भी अकेले होने के कारण परेशान हैं। क्योंकि उनकी देखरेख करने वाला अब कोई नहीं है। आंखों में आंसू भरे इस मजदूर की कहानी किसी को भी रोने को मजबूर कर देगी। ऐसी ही कहानी लगभग सभी मजदूरों की है, जिनके घरों पर परेशानियां है और घर वाले उनके यहां फंसे होने के कारण और भी ज्यादा परेशान हैं। अब अगर वह अपने घर पहुंच जाएं तो अपनी और अपने परिवार की परेशानियों का हल निकाल लेंगे।

घर जाने का निकले कोई रास्ता

कोल्ड स्टोर के मालिक जीशान बताते हैं कि कश्मीर से यह 34 मजदूर दो महीने पहले यहां आये थे और लॉकडाउन की वजह से यहीं फंस गए। वह अपने सभी मजदूरों की परेशानियों को देखते हुए उनके खाने पीने की व्यवस्था कर रहे हैं। मजदूरों की परेशानी खाना नहीं बल्कि अपने घर जाना है। लॉकडाउन की वजह से उनके जाने का कोई रास्ता निकल नही पा रहा है। शीघ्र ही कोई रास्ता निकालने की प्रशासन से मांग करेंगे और मजदूरों को उनके घर भेजने का काम करेंगे। जीशान बताते हैं कि इन लोगों के घर पर भी पैसा नही है और न ही यह भेज पा रहे हैं। क्योंकि इनके बैंक खाते नही हैं। अपर जिलाधिकारी बाराबंकी से भी वह इनको घर भेजने की फरियाद कर चुके हैं, मगर अभी तक कोई रास्ता निकल नही पाया है। इनको घर भेजने में जितना भी खर्च आएगा वह उठाने को तैयार हैं।

मदद में जुटे समाजसेवी

वहीं मजदूरों की परेशानी सुनकर उनकी मदद करने पहुंचे समाजसेवी नवीन सिंह राठौर ने बताया कि उनको जानकारी हुई।थी कि यहां कुछ मजदूर फंसे हुए हैं। वह उनके खाने पीने की व्यवस्था के लिए वह खाद्य सामग्री लेकर आये हैं। यहां फंसे मजदूरों की हालत बहुत चिंताजनक है और वह जिला प्रशासन से मिलकर कोई रास्ता निकालने की मांग करेंगे।

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