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अब नहीं गूंजेगा परिंदों का कलरव
इन पेड़ों पर बसेरा कर अपना दाना-पानी ले रहे व अपने परिवार को पाल रहे तोता मैना, कबूतर, कौए, कोयल, चिड़ियों समेत विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की चहचहाहट अब बीते जमाने की बात हो गई है। किसानों के लिए कार्यालय का महत्व बता इसका विरोध करने वालों को भी कानोंकान खबर नहीं लगी तो सिंचाई विभाग के अधिकारी जमीन को अस्पताल प्रशासन को सुपुर्द करने का पत्र बनाने में जुट गए, लेकिन इन परिंदों की खैर खबर किसी ने नहीं ली। बहरहाल कुछ बचे पेड़ों पर फिर पक्षियों की किलकारियां गूंज रही है। लेकिन घोंसलों के चूजे कराहने को मजबूर है। तो बचे पेड़ों को भी भविष्य में जमींदोज करेंगे तो फिर इन मूक परिंदों की जान आफत में आने की तैयारी है।