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Rajasthan ACB Trap : अब ट्रेफिक इंचार्ज SI चढ़ा हत्थे, मासिक बंधी के 7 हज़ार वसूलते रंगे हाथ ट्रेप

बारां में एसीबी (ACB) की बड़ी कार्रवाई। ट्रैफिक इंचार्ज एसआई चंद्रप्रकाश 7,000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार। मासिक बंदी वसूलने का आरोप।
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बारां

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Nakul Devarshi

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Updated: 31 May 2026, 12:55 PM IST

Baran ACB Trap Traffic Incharge SI Chandraprakash Bribe Case Rajasthan Police

Traffic Incharge SI Chandraprakash

राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने के बारां जिले में जाल बिछाकर ट्रैफिक इंचार्ज (यातायात प्रभारी) सब-इंस्पेक्टर चंद्रप्रकाश को रिश्वत की रकम के साथ रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी सब-इंस्पेक्टर चंद्रप्रकाश स्थानीय क्षेत्र में चलने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के मालिकों से बिना किसी रुकावट के काम करने देने के एवज में अवैध रूप से 'मासिक बंदी' वसूल रहा था। एसीबी की इस औचक और बड़ी कार्रवाई के बाद से बारां जिला पुलिस प्रशासन और स्थानीय यातायात शाखा के कर्मचारियों में खलबली मची हुई है। सामने आया है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को लगातार इस बात की गुप्त शिकायतें मिल रही थीं कि बारां शहर और उसके आसपास के मार्गों पर चलने वाले व्यावसायिक वाहनों, विशेषकर निर्माण सामग्री और कृषि कार्यों में लगी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के चालकों को बेवजह परेशान किया जा रहा है और उनसे एंट्री व मासिक बंदी के नाम पर मोटी रकम ऐंठी जा रही है। इस शिकायत का सत्यापन करने के बाद एसीबी की टीम ने पूरी योजना के साथ आरोपी अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ने का जाल बुना।

ऐसे रचा गया पूरा 'चक्रव्यूह'

इस पूरी कार्रवाई को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया ताकि आरोपी सब-इंस्पेक्टर को भनक तक न लग सके। बारां में हुई इस ट्रैप कार्रवाई का सफल संचालन एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) कालूराम वर्मा के सीधे नेतृत्व में किया गया। एएसपी कालूराम वर्मा की टीम ने शिकायतकर्ता की गुप्त सूचना के आधार पर सबसे पहले रिश्वत की मांग का पूरी तरह से सत्यापन करवाया, जिसमें यह बात साफ हो गई कि ट्रैफिक इंचार्ज चंद्रप्रकाश बिना पैसे लिए वाहनों को क्षेत्र में चलने नहीं दे रहा था।

वहीं दूसरी ओर, इस पूरी कार्रवाई की निगरानी और तकनीकी दिशा-निर्देशन उच्च स्तर से किया जा रहा था। यह पूरी ट्रैप कार्रवाई एसीबी के उप महानिरीक्षक (DIG) ओमप्रकाश मीणा के कुशल सुपरविज़न में संचालित की गई। डीआईजी ओमप्रकाश मीणा ने बारां और कोटा एसीबी की टीमों को आपसी समन्वय के साथ त्वरित एक्शन लेने के कड़े निर्देश दिए थे। जैसे ही शिकायतकर्ता रिश्वत की राशि लेकर ट्रैफिक प्रभारी के पास पहुंचा और आरोपी ने पैसे अपने हाथ में लिए, वैसे ही पहले से तैयार बैठी एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया।

पूरा खेल 'मासिक बंदी' का

हाड़ौती अंचल और विशेष रूप से बारां जैसे जिलों में कृषि और स्थानीय व्यापार से जुड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की संख्या काफी अधिक है। 'मासिक बंदी' दरअसल भ्रष्टाचार का वह पुराना और संगठित रूप है, जिसके तहत भ्रष्ट अधिकारी किसी भी वाहन मालिक या व्यवसायी से हर महीने एक निश्चित राशि एडवांस या तय तारीख पर वसूलते हैं। इस राशि को देने के बाद संबंधित वाहन को बिना किसी कानूनी चेकिंग, चालान या कागजी कार्रवाई के अवैध रूप से सड़कों पर दौड़ने की खुली छूट दे दी जाती है।

शिकायत के अनुसार, बारां के ट्रैफिक इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर चंद्रप्रकाश ने भी क्षेत्र के ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों के लिए एक मासिक दर तय कर रखी थी। जो वाहन स्वामी इस तय राशि को देने में आनाकानी करता था, उसके वाहनों के बार-बार चालान काटे जाते थे या उन्हें ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के नाम पर थानों में खड़ा करवा दिया जाता था। इस मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना से तंग आकर आखिरकार एक सजग नागरिक ने भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का दरवाजा खटखटाया, जिसके परिणामस्वरूप आज यह भ्रष्ट अधिकारी कानून के शिकंजे में आ चुका है।

7,000 रुपए की घूस लेते रंगे हाथों अरेस्ट

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने जैसे ही ट्रैफिक इंचार्ज चंद्रप्रकाश को 7,000 रुपए की घूस लेते हुए पकड़ा, उसके तुरंत बाद की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई। एसीबी के नियमानुसार, आरोपी के हाथों को जैसे ही एक विशेष रासायनिक घोल (सोडियम कार्बोनेट सॉल्यूशन) से धुलवाया गया, वैसे ही उसके हाथों का रंग तुरंत गुलाबी हो गया। यह इस बात का सबसे बड़ा और पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण है कि आरोपी सब-इंस्पेक्टर चंद्रप्रकाश ने अपने हाथों से सीधे तौर पर घूस की वह राशि स्वीकार की थी।

रंगे हाथों गिरफ्तारी की इस औचक कार्रवाई के तुरंत बाद एसीबी के एएसपी कालूराम वर्मा के निर्देश पर आरोपी अधिकारी के बारां स्थित आधिकारिक दफ्तर और सरकारी दस्तावेजों को तुरंत सीज कर दिया गया। इसके साथ ही, एसीबी की एक अन्य सर्च टीम को आरोपी सब-इंस्पेक्टर चंद्रप्रकाश के आवासीय ठिकानों और पैतृक घर की तलाशी के लिए भी रवाना कर दिया गया है। एसीबी इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि क्या इस मासिक बंदी के खेल में पुलिस महकमे के कुछ अन्य निचले या उच्च स्तर के अधिकारी भी शामिल थे या यह पूरी अवैध वसूली केवल चंद्रप्रकाश के स्तर पर ही की जा रही थी।