
बारां/छबड़ा. छबड़ा-छीपाबड़ौद तहसील के राजस्व रेकार्ड को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया 9 माह से जारी है। परंतु अब तक इसका आधुनिकीकरण नहीं किया जा सका है। इसके चलते किसानों को परेशानी हो रही है। उनके राजस्व संबंधी सभी कार्य ठप हैं। छबड़ा-छीपाबड़ौद तहसील में पांच से छह हजार इंतकाल नहीं खुल सके हैं। इसके चलते किसानो को कृषि भूमि पर केसीसी ऋण आदि की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।
डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत छबड़ा-छीपाबड़ौद तहसील के राजस्व रिकॉर्ड के कंप्यूटरीकरण व मानचित्रों के डिजिटलीकरण का कार्य जनवरी माह से प्रारंभ किया गया था। छबड़ा में 28 व छीपाबड़ौद में 32 पटवार हल्के स्थित हैं। छीपाबड़ौद के राजस्व कर्मियो के सहयोग से 3 माह पूर्व राजस्व रिकॉर्ड अपडेट कर राज्य सरकार ने इसके लिए नियुक्त संबंधित फर्म को जिला प्रशासन के माध्यम से दे दिया गया है।
छबड़ा तहसील का राजस्व रिकॉर्ड भी 5 जुलाई को अपडेट कर लिया गया है। परंतु संबंधित फर्म द्वारा अब तक राजस्व रिकॉर्ड का आधुनिकीकरण का कार्य अब तक नही किया गया हैं। राजस्व रिकॉर्ड को ऑनलाइन किए जाने की प्रक्रिया के चलते जनवरी माह से अब तक छबड़ा-छीपाबड़ौद में कृषि भूमि के 5-6 हजार नामांतरण नहीं हो पा रहे हैं। बैंकों में ऋण राशि जमा करने के बाद भी भूमि रहनमुक्त नही हो पा रही हैं। फोती इंतकाल भी नही खुल पा रहे हैं। किसान परेशान हैं, अधिकारी भी इसकी कोई तय समयावधि नही बता पा रहे हैं।
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बारां एसडीएम दिव्यांशु शर्मा ने बताया कि डीआरएलआरएमजी के तहत जिस फर्म को कांट्रेक्ट दिया गया है। उसके द्वारा ऑनलाइन रेकार्ड तैयार कर जांच के लिए अब तक नही दिया गया हैं। शीघ्र ही छीपाबड़ौद का राजस्व रेकार्ड मिलने की संभावना हैं। इसकी जांच छीपाबडौद के राजस्व कर्मियों करने के बाद ऑनलाइन कर दिया जाएगा। छबड़ा तहसील के राजस्व रेकार्ड के मानचित्र आदि तैयार किए जाने की प्रक्रिया जारी है। आगामी डेढ़-दो माह में दोनो तहसीले ऑनलाइन हो जाएगी और किसानों के रुके हुए सभी कार्य प्रारंभ हो सकेंगे।
Published on:
28 Sept 2022 03:02 pm
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