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राज्य कर खंड-एक के सहायक आयुक्त अभिषेक शुक्ल की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, प्रमोद चौधरी ने वर्ष 2024-25 में सुभाष नगर स्थित तिरुपति धाम के पते पर मैसर्स पीसी इंटरप्राइजेज नाम से फर्म का पंजीकरण कराया था। जांच में आरोप लगा कि फर्म ने सर्कुलर ट्रेडिंग और फर्जी बिलिंग के माध्यम से करीब 1.28 करोड़ रुपये के कर राजस्व को नुकसान पहुंचाया।
संदेह होने पर विभागीय टीम ने फर्म का भौतिक सत्यापन कराया। जांच के दौरान संबंधित पते पर किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि नहीं मिली। स्थानीय लोगों ने भी बताया कि वहां से कभी कोई व्यापार संचालित नहीं हुआ। इससे फर्म के अस्तित्व और कारोबार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
जांच में सामने आया कि फर्म ने वर्ष 2024-25 में विभिन्न कंपनियों को करोड़ों रुपये की आउटवर्ड सप्लाई दर्शाते हुए करीब 59.90 लाख रुपये की आईजीएसटी देनदारी स्वीकार की, लेकिन इसका भुगतान फर्जी आईटीसी के जरिए समायोजित कर लिया। वहीं इनवर्ड सप्लाई के नाम पर लगभग 3.81 करोड़ रुपये की खरीद दिखाकर 68.64 लाख रुपये के आईटीसी का अनुचित लाभ लिया गया।
विभागीय जांच में यह भी पाया गया कि 50 हजार रुपये से अधिक के लेनदेन दर्शाने के बावजूद किसी भी ट्रांजेक्शन के लिए ई-वे बिल जारी नहीं किए गए। खरीद और बिक्री की पूरी श्रृंखला संदिग्ध तथा असंगत पाई गई, जिससे स्पष्ट हुआ कि लेनदेन केवल कागजों पर दर्शाए गए थे।
प्राथमिक जांच में फर्जी कारोबार और कर चोरी के पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद राज्य कर विभाग ने फर्म संचालक प्रमोद चौधरी के खिलाफ साइबर थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है। पुलिस और विभागीय अधिकारी अब मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं।
Published on:
02 Jun 2026 08:19 pm
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