
मानवाधिकार आयोग में शिकायत करेंगी निदा खान
बरेली। तलाक पीड़ित महिलाओं की मदद को आगे आई निदा खान के खिलाफ फतवा जारी किया गया है। दरगाह आला हजरत के दारुल इफ्ता से जारी किए गए फतवे के मुताबिक निदा खान को इस्लाम से खारिज कर दिया गया है और मुसलमानों से कहा गया है कि वो निदा खान से दूरी बनाकर रखें और अगर वो बीमार पड़ती है तो देखने न जाएं और अगर उसकी मौत होती है तो नमाज ए जनाजा न पढ़ी जाए और कब्रिस्तान में दफन न करने दिया जाए। दारुल इफ्ता से फतवा जारी होने के बाद निदा खान ने भी पलटवार किया है। निदा का कहना है कि ये उनके मानवाधिकार का हनन है और वो इसको लेकर मानवाधिकार आयोग में शिकायत करेंगी।
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क्यों शुरू हुआ विवाद
निदा खान ने अपने घर पर आठ जुलाई को प्रेस कांफ्रेंस की थी जिसमें तलाक पीड़ित और हलाला पीड़ित महिलाओं ने हिस्सा लिया था और अपने साथ हुई ज्यादती को मीडिया के सामने बताया था जिसमें एक महिला ने ससुर द्वारा हलाला करने की बात कही थी इस प्रेस कांफ्रेस में निदा खान ने मांग की थी कि तीन तलाक के साथ हलाला और बहु विवाह के खिलाफ कानून बनाया जाए। इस प्रेस कांफ्रेंस के बाद हंगामा खड़ा हो गया और निदा को इस्लाम से खारिज करने की बात की जाने लगी।
फतवा हुआ जारी
जिसके बाद शहर इमाम ने दारुल इफ्ता से फतवा मांगा और शहर काजी ने निदा खान के खिलाफ फतवा जारी कर निदा खान को इस्लाम से खारिज कर दिया गया। शहर इमाम मुफ़्ती खुर्शीद आलम ने दरगाह आला हजरत पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि निदा का हुक्का पानी बन्द कर दिया गया है। मुफ़्ती खुर्शीद आलम ने कहा कि निदा की मदद करने वाले, उससे मिलने जुलने वाले मुसलमानों को भी इस्लाम से खारिज किया जाएगा। निदा अगर बीमार हो जाती है तो उसको दवा भी नहीं दी जाएगी, निदा की मौत पर जनाजे की नवाज पढ़ने पर भी रोक लगा दी गई है। इतना ही नहीं निदा के मरने पर उसे कब्रिस्तान में दफनाने पर भी रोक लगा दी गई है।
क्या कहा निदा ने
वहीं फतवा जारी होने के बाद निदा ने पलटवार करते हुए कहा कि भारत मे दो कानून नहीं चलेंगे और उसके खिलाफ फतवा जारी कर उसके मानवाधिकार का हनन किया गया है जिसके कारण अब वो इस मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग से करेगी।
Published on:
18 Jul 2018 04:33 pm
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