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इस मेले में मिलेंगे 5.5 किलोग्राम चांदी के पुरस्कार, जानें 5 अप्रैल से राजस्थान में कहां लगेगा मेला

Shri Mallinath Animal Fair 2024: श्री मल्लीनाथ पशु मेला तिलवाड़ा प्रारंभ होने से पहले ही यहां पशुपालक पशु लेकर पहुंच रहे हैं। विभिन्न प्रकार की दुकानेें लगने पर लोग मेले में पहुंच रहे हैं। मोलभाव करने के साथ खरीदारी कर रहे हैं।

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Rajasthan Special Fair 2024: श्री मल्लीनाथ पशु मेला तिलवाड़ा प्रारंभ होने से पहले ही यहां पशुपालक पशु लेकर पहुंच रहे हैं। विभिन्न प्रकार की दुकानेें लगने पर लोग मेले में पहुंच रहे हैं। मोलभाव करने के साथ खरीदारी कर रहे हैं। मेले में इस साल भी पशुपालकों को विभिन्न प्रतियोगिताओं में चांदी के पुरस्कार भामाशाह पृथ्वीराजसिंह कोळू की ओर से दिए जाएंगे। मेले का झंडारोहण 5 अप्रैल से होगा। 1 अप्रैल से मेला मैदान पर चौकियां लगेगी। इन चौकियां पर मेले में पहुंचने वाले पशुओं की संख्या का पंजीयन किया जाएगा। लेकिन मेला प्रारंभ होने से पहले ही पशुपालक पशु लेकर पहुंचने शुरू हो गए हैं। दो दिन पहले पशुपालकों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ था,जो शुक्रवार को भी जारी रहा।

5.5 किलोग्राम चांदी का पुरस्कार
अप्रवासी भारतीय और भामाशाह पृथ्वीराजसिंह कोळू की ओर से मेले में पशुपालकों को विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता रहने पर 5 किलो 500 ग्राम चांदी का पुरस्कार दिया जाएगा। पृथ्वीराजसिंह इससे पहले दो साल भी इसी तरह पुरस्कृत कर चुके है। प्रथम तीन ऊंट, घोड़े और गाय को एक एक किलोग्राम चांदी मिलेगी। द्वितीय आने वाले को 500-500 ग्राम और तृतीय आने वाले पशुपालकों को 250-250 ग्राम चांदी का पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलाव मैडल देकर सम्मानित किया जाएगा।

सैकड़ों पशु पहुंचे, दुकानें लगनी शुरू
श्री मल्लीनाथ पशु मेला तिलवाड़ा में शुक्रवार शाम तक 200 से अधिक घोड़े, 50 गाय, बैल पहुंचे। शाम तक इनके पहुंचने का सिलसिला जारी था। अगले दो दिन में अधिकांश पशुपालकों के पशुओं को लेकर पहुंचने पर मेला खचाखच भरेगा। वहीं मेला स्थल पर दुकानें सजने लगी है जिससे रौनक है।
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इनका कहना है
देश के बड़े पशु मेले से पशुपालन विभाग को लाखों रुपए आय होती है। जबकि वह मेला आयोजन सुविधाओं पर वह एक नया पैसा खर्च नहीं करता है। ग्राम पंचायत सीमित आय होने के बावजूद लाखों रुपए खर्च करती है। इससे विकास के अन्य कार्य प्रभावित होते हैं। कई वर्ष से मेला आयोजन के लिए बजट की मांग कर रहे हैं। लेकिन सुनवाई नहीं की जा रही है।
-सोहनसिंह मकवाना

देश विख्यात पशु मेले आयोजन को लेकर सरकार, प्रशासन वह पशुपालन विभाग गंभीर नहीं है। अन्य गैर जरूरी कार्यों पर सरकार लाखों रुपए खर्च करती है। लेकिन मेला आयोजन के लिए एक नया पैसा का बजट आवंटित नहीं करती है। इस पर वर्ष दर वर्ष मेले की रौनक फीकी हो रही है। सरकार अलग से मेला के लिए विशेष बजट आवंटित करें।
-जोगाराम पंवार
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तिलवाड़ा मेले में व्यवस्थाओं को लेकर जिला कलक्टर ने अधिकारियां को सख्त निर्देश दिए। इसके बाद पशुपालन महकमे के अधिकारी मेला स्थल पहुंचे। यहां उन्होंने व्यवस्थाओं को दुरस्त किया। तिलवाड़ा पशु मेला स्थान पर कई अव्यवस्थाओं को लेकर राजस्थान पत्रिका ने शुक्रवार के अंक में मेला प्रारंभ होने से पहले पहुंचा पशुधन- व्यवस्थाओं के अभाव में पशुपालक परेशान शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें मैदान मार्ग का पूरा समतलीकरण नहीं करने, स्टेडियम के पास समुचित सफाई नहीं करने, पशुओं के पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं करने आदि समस्याओं का उल्लेख किया था। इस पर हरकत में आए प्रशासन ने शुक्रवार को व्यवस्था में सुधार किया। पशु खेलियों में पानी डलवाने पर पशुपालकों ने बड़ी राहत महसूस की। कार्मिक अन्य व्यवस्थाओं को भी पूरा करने में जुटे हुए थे।

ये भी दिए निर्देश
●मेले में पुलिस व सुरक्षा का हों बंदोबश्त
●पशुपालकों को पानी की नहीं आए कमी
● प्रतियोगिताओं का व्यवस्थित आयोजन करवाया जाए
●मेले में पशुपालकों के लिए एटीएम व अन्य सुविधाओं के लिए भी दिया जाए ध्यान

चुनाव का हो रहा मेले पर असर
मेले पर इस बार लोकसभा चुनाव का भी असर है। पिछले मेलों में केन्द्रीय मंत्री पहुंचे थे। यहां पर कृषि विभाग की ओर से प्रदर्शनी भी लगी थी,जिसमें 100 से अधिक स्टॉल लगाई गई थी। इस बार मेला आचार संहिता अवधि में आने से ये इंतजाम नहीं हो पा रह है।


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