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Rajasthan: 65 साल के छात्र… 85 साल के गुरुजी, क्लासरूम में भावुक पल देख अचरज में पड़े बच्चे

बाड़मेर के एक स्कूल में 50 साल बाद मिले पूर्व छात्रों ने अपनी स्वर्ण जयंती मनाई। 65-68 साल के पूर्व छात्रों ने अपने 85-90 साल के गुरुओं से फिर से कक्षा में बैठकर पढ़ाई की। एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखकर बच्चे भी अचरज में पड़ गए।

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65 year old student

कवास में 1974-75 बैच के दसवीं के विद्यार्थियों को पढ़ाते शिक्षक भींयाराम (फोटो-पत्रिका)

बाड़मेर। 65 से 68 साल के विद्यार्थी कक्षा में दरी पट्टी पर पालती मारकर बैठे और सामने उनके 85 से 90 की उम्र के वही शिक्षक जिन्होंने 1974-75 में यानि 50 साल पहले पढ़ाया था, पढ़ा रहे थे। बुजुर्गों की यह कक्षा जरूर थी लेकिन ये बुजुर्ग अपने बचपना को जी रहे थे।

कवास के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शनिवार को लगी इस अनोखी कक्षा ने वर्तमान विद्यार्थियों को रोमांचित कर दिया। कवास के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शनिवार को 1974-75 में दसवीं करने वाले विद्यार्थियों ने पहुंचकर अपना स्वर्णजयंती वर्ष मनाया।

इसी बैच से निकले छात्र बने डीजीपी

विद्यालय के इस बैच से निकले तमिनलाडु कैडर के पूर्व डीजीपी पुलिस सांगाराम जांगिड़ की अगुवाई में यह कार्यक्रम हुआ। 21 विद्यार्थी हाजिर हुए। पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में ये सारे विद्यार्थी कतारबद्ध तरीके से पहुंचे जैसे स्कूल में प्रवेश होते थे। फिर यहां प्रार्थना सभा की। मंच 1974-75 में ही उन्हें पढ़ाने वाले तीनों शिक्षक भींयाराम चौधरी, स्वरूपसिंह और जेठनाथ गोस्वामी मौजूद थे, जिनके चरण स्पर्श किए।

रोचक कक्षा लगी, किस्से सुनाए

सांगाराम जांगिड़ और सरदाराराम 50 साल बाद मिले। जब दोनों ने एक-दूसरे को देखा तो गदगद हो गए। शिक्षक जेठनाथ गोस्वामी अपने पुराने विद्यार्थियों को एक साथ देखकर आंसू नहीं रोक पाए। भींयाराम और स्वरूपसिंह पूर्ण भावुक थे। एक-दूसरे से गले मिलते हुए इन साथियों ने कई बातें साझा की। फिर एक रोचक कक्षा लगी। विद्यालय के ही कक्षा-कक्ष में तीनों शिक्षकों ने ब्लैक बोर्ड पर लिखना शुरू किया। इसके बाद दरी पट्टी पर ये सभी 21 बुजुर्ग बच्चों की तरह बैठे और फिर से इन बुजुर्ग गुरुजनों से पाठ पढ़ा। विद्यालय को वाटर कूलर भेंट किया।

नई पीढ़ी बोली…हम भी आएंगे

कार्यक्रम के दौरान इस स्कूल में नई पीढ़ी सामने बैठी सीख रही थी तो वे बोले हम भी जब बूढ़े होंगे तो फिर से आएंगे और ऐसे ही बैठेंगे। इस दौरान वे ये बतियाते भी दिखे कि मैं वैसा दिखूंगा और तू कुछ वैसा। प्राचार्य हनुमानाराम चौधरी ने इस पल को और दिन को मिसाल बताते हुए कहा कि यह पहल हमें ही नहीं अन्य स्कूलों को भी प्रेरित करेगी।

विद्यार्थियों को किया प्रोत्साहित

प्रार्थना सभा के बाद गांव के मौजिज लोग और विद्यार्थी मौजूद थे। इनको सभी ने प्रोत्साहित करते हुए बताया कि इस स्कूल में पढ़ने के बाद उन्होंने जीवन में कैसे सफलता हासिल की। सभी सेवानिवृत्त हो चुके हैं या अपने कारोबार में भी अब निवृत्त हैं। विद्यार्थियों को इन्होंने हौसला अफजाही की कि अब तो सारी सुविधाएं और संसाधन हैं। हम जब यहां पढ़ते थे तो पानी पीने के लिए भी दूर से लाना पड़ता और सात-आठ किमी नंगे पांव पैदल चलकर पढ़ने आते थे। एक ही ललक थी कि पढ़ेंगे तो जिंदगी सुधरेगी, बस इसी ध्येय ने हमें सफल किया।


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