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Rajasthan News : लॉटरी निकली, घर का सपना अटका: बजट मंजूरी के इंतजार में ठप पड़ी 200 आवासों की योजना

Barmer Housing Scheme : राजस्थान आवासन मडण्ल की ओर से बाड़मेर शहर में शुरू की गई लंगेरा आवासीय योजना लॉटरी के बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है।

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Barmer Housing Scheme

बाड़मेर लंगेरा आवासीय योजना। फोटो पत्रिका नेटवर्क

बाड़मेर। “हमारा प्रवास, सबको आवास” थीम के तहत राजस्थान आवासन मडण्ल की ओर से बाड़मेर शहर में शुरू की गई लंगेरा आवासीय योजना लॉटरी के बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। 200 आवासों का आवंटन होने के बावजूद निर्माण कार्य बजट स्वीकृति के अभाव में अटका हुआ है। तीन माह से प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी लंबित रहने से पूरी योजना ठहराव की स्थिति में पहुंच गई है, जिससे लॉटरीधारकों में असमंजस, चिंता और नाराजगी बढ़ती जा रही है।

आवास मण्डल ने अगस्त 2025 में इस योजना के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इसके बाद नवंबर 2025 में लॉटरी के जरिए 200 आवासों का आवंटन किया गया। लॉटरी निकलने के बाद लाभार्थियों के चेहरे पर अपने घर के सपने को साकार करने की उम्मीद झलक रही थी, लेकिन अब हालात इसके विपरीत हैं। मौके पर केवल ग्रेवल सड़कें बनाकर प्रारंभिक कार्य तो कर दिया गया, लेकिन मकानों का निर्माण शुरू नहीं हो सका है।

14 करोड़ का प्रस्ताव, फाइलों में उलझी योजना

आवास निर्माण के लिए मण्डल ने करीब 14 करोड़ रुपए का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेज दिया है। इसके बावजूद तीन माह का समय बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पाई है। फाइल लंबित रहने के कारण न तो निर्माण कार्य शुरू हो पा रहा है और न ही आगे की प्रक्रिया बढ़ रही है। इससे योजना पूरी तरह कागजों में सिमट कर रह गई है।

लॉटरीधारकों में बढ़ी बेचैनी और असमंजस

दूसरी ओर, लॉटरी में नाम आने के बाद घर मिलने की उम्मीद लगाए बैठे लोग अब गहरी असमंजस की स्थिति में हैं। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के वे आवेदक, जिन्होंने इस योजना को अपने स्थायी आवास के रूप में देखा था, अब लगातार इंतजार कर रहे हैं। उन्हें न तो निर्माण की कोई तय समयसीमा बताई गई है और न ही कोई स्पष्ट सूचना दी जा रही है। ऐसे में कई लाभार्थी यह सोचने को मजबूर हैं कि लॉटरी में नाम खुलने के बाद भी क्या उन्हें वास्तव में आवास मिल पाएगा या नहीं।

जमीन पर अधूरी तैयारी, भरोसे पर असर

योजना स्थल पर केवल ग्रेवल सड़कें बनाकर प्रारंभिक ढांचा तैयार किया गया है, लेकिन मुख्य निर्माण कार्य के अभाव में पूरा क्षेत्र अधूरा नजर आता है। न तो आवास निर्माण की शुरुआत हुई है और न ही अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास हो पाया है। इससे न केवल योजना की गति प्रभावित हो रही है, बल्कि आमजन का भरोसा भी डगमगाने लगा है।

प्रशासनिक सुस्ती या प्रक्रिया की देरी?

तीन माह तक प्रस्ताव लंबित रहना प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है। आमतौर पर आवासीय योजनाओं में लॉटरी के बाद निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने की अपेक्षा होती है, ताकि लाभार्थियों को समय पर मकान मिल सके। लेकिन इस योजना में बजट स्वीकृति में हो रही देरी ने पूरी प्रक्रिया को धीमा कर दिया है।

स्वीकृति मिलते ही होगा काम शुरू

लॉटरी के बाद निर्माण कार्य के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि मौके पर ग्रेवल सड़कें तैयार कर ली गई हैं और जैसे ही प्रशासनिक व वित्तीय मंजूरी के साथ बजट प्राप्त होगा, आवास निर्माण कार्य तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।

दीपक बिस्सा, आवास अभियंता