
1 जून से बाड़मेर-मुनाबाव स्पेशल ट्रेन बनेगी सामान्य, किराया आधा, पत्रिका फोटो
बाड़मेर-मुनाबाव रेल खंड पर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए राहत की खबर है। 1 जून 2026 से इस रूट पर चलने वाली बाड़मेर-मुनाबाव स्पेशल ट्रेन को सामान्य पैसेंजर ट्रेन का दर्जा मिल जाएगा, जिससे किराया आधा ही जाएगा। रेलवे ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए। रेलवे ने कुछ माह पूर्व सुबह-शाम चलने वाली स्पेशल ट्रेन को 6-6 माह के ट्रायल पर चलाया था। 30 मई को ट्रायल की समय सीमा पूरी होने के बाद रेलवे ने इसे स्थायी करने का फैसला लिया है।
1 जून से स्पेशल ट्रेन का नंबर बदल जाएगा और यह सामान्य पैसेंजर बनकर चलेगी। पुरानी स्पेशल ट्रेन संख्या 04879/80 अब नई नियमित ट्रेन संख्या 54879/80 के रूप में चलेगी। सीमावर्ती क्षेत्र में दो वर्षों तक चली 'पत्रिका' की मुहिम और ग्रामीणों के संघर्ष के बाद । मार्च 2024 से शुरू हुआ शाम का दूसरा फेरा भी अब स्थायी हो गया है।
स्पेशल से सामान्य ट्रेन होते ही किराए में सीधी 50 प्रतिशत की कटौती होगी। वहीं 10-15 किमी का लोकल सफर का किराया 35 से घटकर 10 रुपए लगेगा। 125 किमी दूरी तक बाड़मेर-मुनाबाव सफर का किराया अब 60 की बजाय 30 रुपए लगेगा।
गौरतलब है कि कोरोनाकाल में सामान्य पैसेंजर ट्रेनों के आगे 'जीरो लगाकर उन्हें स्पेशल ट्रेन का दर्जा दे दिया गया था और किराया दुगुना कर दिया गया था। करीब पांच साल बाद रेलवे ने आम आदमी को राहत देते हुए पुरानी व्यवस्था बहाल की है। रेलवे के इस फैसले से सीमावर्ती गांवों के दैनिक यात्रियों, मजदूरों और छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। आदेश की जानकारी मिलते ही पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई।
थार क्षेत्र के रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। राजस्थान को उत्तराखंड से जोड़ने वाली काठगोदाम-जैसलमेर रानीखेत एक्सप्रेस अब आधुनिक एलएचबी रैक के साथ दौड़ेगी। रेलवे के इस निर्णय से फलोदी, रामदेवरा और जैसलमेर क्षेत्र के हजारों यात्रियों को अधिक सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुविधा मिल सकेगी।
उत्तर पश्चिम रेलवे के अनुसार ट्रेन संख्या 15014/15013 रानीखेत एक्सप्रेस और 25014/25013 रानीखेत लिंक एक्सप्रेस में पारंपरिक आईसीएफ कोच हटाकर एलएचबी कोच लगाए जाएंगे। काठगोदाम से यह व्यवस्था एक अगस्त और जैसलमेर से तीन अगस्त से लागू होगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार एलएचबी कोच आधुनिक तकनीक से लैस होते हैं। इनमें एंटी-टेलिस्कोपिक तकनीक होने से दुर्घटना के समय डिब्बे एक-दूसरे पर नहीं चढ़ते, जिससे यात्रियों की सुरक्षा बढ़ जाती है। इसके अलावा इन कोचों में बेहतर सस्पेंशन सिस्टम होने से झटके कम लगते हैं और ट्रेन हाईस्पीड में भी अधिक स्थिर रहती है। कोचों में शोर कम होने के साथ ब्रेकिंग सिस्टम भी अधिक प्रभावी माना जाता है।
Updated on:
28 May 2026, 1:36 PM IST
Published on:
28 May 2026, 1:36 PM IST
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