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नगर परिषद ठेकेदार बाबूलाल के टांके में मिले शव का मामला हत्या व आत्महत्या में उलझा हुआ है। वहीं सुसाइड नोट मिलने के बाद सभापति के खिलाफ दर्ज हुआ मामला पिछले 23 दिनों से जांच में लटक रहा है। गौरतलब है कि मृतक बाबूलाल ने सुसाइड नोट में सभापति सहित दो कर्मचारियों पर प्रताडि़त होकर आत्महत्या करने का आरोप लगाया था। सुसाइड नोट मिलने के बाद परिजनों ने सदर थाना में मामला दर्ज करवाया।
23 दिन बाद पुलिस ने जब्त किया रिकॉर्ड
सुसाइड नोट मिलने पर सभापति के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। जिसकी जांच डिप्टी ओपी उज्ज्वल को सौंपी गई थी। लेकिन मामले के 23 दिन बाद पुलिस ने नगर परिषद से रिकॉर्ड व सीसीटीवी फुटेज लिए हैं। इससे पुलिस जांच कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसकी जांच कौन करेगा?
नगर परिषद में ठेकेदारों के साथ कमीशनखोरी का सुसाइड नोट में जिक्र था। इसमें भी सभापति के कार्यकाल की जांच एसीबी से करवाने की मांग भी की थी। एसबी में भी मृतक के पुत्र ने शिकायत दर्ज करवाई थी। लेकिन एसबी के पुलिस उप अधीक्षक ने बताया कि शिकायत तो मिली थी। लेकिन मामला उच्च स्तर का होने पर इसे जयपुर भेज दिया है। वहां से दर्ज होने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।
अनिश्चितकालीन धरना शुरू
ठेकेदार को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में सुसाइड नोट में मिले तथ्यों की जांच करवाने की मांग को लेकर जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। धरने पर बैठे दलित समाज एवं राजस्थान मेघवाल परिषद के जिलाध्यक्ष मूलाराम मेघवाल ने आरोप लगाया कि बाबूलाल ने नगर परिषद के कार्मिकों के भ्रष्ट रवैये एवं अभद्र व्यवहार से आहत व प्रताडि़त होकर आत्महत्या कर ली। धरने पर मूलाराम मेघवाल अध्यक्ष मेघवाल परिषद, केवलचंद बृजवाल, देवेन्द्र कुमार, श्रवण चंदेल, सोनाराम टांक आदि मौजूद थे।
Published on:
16 Jun 2017 10:26 am
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