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Rajasthan: पूर्व विधायक मेवाराम जैन की कांग्रेस में वापसी, कथित अश्लील सीडी प्रकरण के बाद हुए थे निष्कासित

Rajasthan Politics: राजस्थान की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन का कांग्रेस में सस्पेंशन खत्म कर पार्टी आलाकमान ने उनकी वापसी को हरी झंडी दे दी है।

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Mevaram Jain

फोटो- पत्रिका नेटवर्क

Rajasthan Politics: राजस्थान की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन का कांग्रेस में सस्पेंशन खत्म कर पार्टी आलाकमान ने उनकी वापसी को हरी झंडी दे दी है। राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा द्वारा पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में मेवाराम जैन के निलंबन को समाप्त करने का आदेश दिया गया। कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदरसिंह रंधावा ने मेवाराम को कांग्रेस में वापसी का पत्र सौंपा। यह आदेश 22 नवंबर का है, जिसको गुरुवार को सौंपा गया।

दरअसल, मेवाराम जैन का मामला बाड़मेर की राजनीति का पुराना विवादास्पद अध्याय रहा है। 2023 में कथित अश्लील सीडी वायरल होने के बाद पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके अलावा, गैंगरेप और POCSO एक्ट के तहत दर्ज FIR की जांच में आरोप झूठे साबित हुए और हाईकोर्ट ने जैन के पक्ष में फैसला सुनाया। न्यायालय के इस फैसले के बाद उनकी वापसी अब औपचारिकता मात्र रह गई थी।

मेवाराम जैन 2008 से 2023 तक बाड़मेर से लगातार तीन बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने पिछले कई महीनों से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और रंधावा जैसे नेताओं से मुलाकातें तेज कर दी थीं। जून 2025 में अनौपचारिक बातचीत में जैन ने अपने 50 साल पुराने कांग्रेस से जुड़ाव का हवाला देते हुए वापसी की मांग की थी।

बता दें, लेकिन यह वापसी आसान नहीं हुई। बाड़मेर-जैसलमेर में कांग्रेस के दूसरे धड़े ने जोरदार विरोध किया। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, पूर्व विधायक पदमाराम मेघवाल, महेंद्र चौधरी, गफूर खान और फतेह खान जैसे नेता दिल्ली पहुंचे और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर जैन की वापसी का विरोध किया था।

इन नेताओं ने अनुशासन समिति के सामने आपत्तियां रखीं, दावा किया कि जैन की वापसी पार्टी की छवि को धूमिल करेगी। हरीश चौधरी गुट के नेता जिला अध्यक्ष सहित दिल्ली में डेरा डाले हुए थे। विरोधियों का आरोप था कि जैन जैसे 'चरित्रहीन' नेता को वापस लाकर कांग्रेस नैतिकता खो देगी। फिर भी, आलाकमान ने स्थानीय विरोध को दरकिनार कर फैसला सुना दिया।

सूत्रों के अनुसार, अनुशासन समिति ने भी वापसी की अनुशंसा की थी। अब वापसी के बाद जैन के समर्थकों में खुशी की लहर है। अब सवाल यह है कि क्या यह वापसी बाड़मेर कांग्रेस को एकजुट करेगी या गुटबाजी और गहरा जाएगी? थार की राजनीति में यह नया अध्याय कैसे रंग लाएगा, आने वाले दिनों में साफ होगा।

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