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सीमा के हम रक्षक, आओ फहराएं घर-घर तिरंगा

पत्रिका अभियान- बांधेंगे रक्षासूत्र- लहराएगा तिरंगा

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बाड़मेर/ जैसलमेर. सीमांत बाड़मेर- जैसलमेर जिला देश के रक्षक की भूमिका में है। रक्षा का एेसा बंधन जो इन दोनों जिलों ने 1947 को देश की आजादी के साथ अपने साथ बांध लिया है। 1965 और 1971 के युद्ध में देश की रक्षा के लिए यहां के आम आदमी ने सेना का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया और पाकिस्तान को धूल चटा दी। करगिल युद्ध हों या पुलावामा के बाद के हालात यहां से एक आवाज उठती है, हम हर समय देश के साथ है।

पंद्रह दिन बाद 15 अगस्त है। संयोग यह भी है इस बार पंद्रह अगस्त और रक्षा बंधन एक साथ है। 19 साल बाद बाद यह स्थिति आई है और आगे 30 साल तक नहीं आनी है। एेसे में देश की सीमा से देश के रक्षक होने का संदेश दें। 26 जनवरी 2002 को हर नागरिक को यह अधिकार मिला है कि वह अपने घर पर ध्वजारोहण कर सकता है।

इसको लेकर अब भी हिचकिचहट है। एेसे में इस बार हम रक्षासूत्र बांधने के साथ तिरंगा फहराने का उत्साह भी बनाएं। आइए, आज से पत्रिका के साथ जुड़कर इस 15 अगस्त को राष्ट्रीय पर्व को दुगुने उत्साह से मनाएं और घर-घर तिरंगा फहराएं।

क्यों जरूरी है यह भावना

देश मजबूती से आगे बढ़ रहा है। पुलवामा के जवाब देशभक्ति का ज्वार लाया है। आतंकवाद को देश से खत्म करने का संदेश प्रतिदिन प्रसारित हो रहा है। देश की सीमाओं को सुरक्षित करने का संदेश दिया जा रहा है। सेना का मनोबल बढऩे के इस दौर में सीमांत जिलों से यह संदेश बहुत जरूरी है। घर-घर तिरंगा लहराएगा तो देश का मान-सम्मान और बढ़ेगा।

पंद्रह दिन हों आयोजन

पंद्रह अगस्त को लेकर स्कूलों में परेड-व्यायाम और तैयारियां प्रारंभ हो चुकी है। केवल स्कूल ही इससे नहीं जुड़े, हर वर्ग आगे आएं। राष्ट्रीय पर्व को लेकर हमारे उत्साह को और बढ़ाएं और 15 अगस्त को यादगार बनाएं।

जानें अपने तिरंगे को

भारत का धवज की परिकल्पना पिंगल वैकेयाने ने की थी। 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक में अपनाया गया। इसके तीन क्षेतिज पट्टियां है, जिसमें ऊपर केसरिया, मध्य में सफेद और नीचे हरा रंग रहता है। सफेद पट्टी के मध्य में एक नीले रंग का चक्र रहता है,जिसमें 24 आरे है।

इसका व्यास पट्टी के बराबर है। इस चक्र का रूप सारनाथ में स्थित अशोक स्तंभ के शेर के शीर्ष फलक चक्र जैसा दिखता है। तिरंगा 3:2 की लंबाई चौड़ाई में रहता है। खादी के हाथ से कते विशेष कपडे़ से निर्मित है। इसके तीनों रंग आत्मरक्षा, शांति व समृद्धि के प्रतीक है।