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Ground Report: रिफाइनरी से पहले उद्योग बसाने का सपना, लेकिन अभी ऐसी है राजस्थान पेट्रोजोन की जमीनी हकीकत

Rajasthan Petrozone: राजस्थान सरकार जिस "राजस्थान पेट्रोजोन" को रिफाइनरी आधारित औद्योगिक विकास का बड़ा मॉडल बताकर निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रही है, उसकी जमीनी तस्वीर फिलहाल दावों से काफी पीछे नजर आती है।

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बाड़मेर

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Anil Prajapat

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सुनील सिंह सिसोदिया

Apr 24, 2026

Borawas-Kalawa Industrial Area

बोरावास-कलावा क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्र का अभी ऐसा है हाल। फोटो: पत्रिका

पचपदरा। राजस्थान सरकार जिस "राजस्थान पेट्रोजोन" को रिफाइनरी आधारित औद्योगिक विकास का बड़ा मॉडल बताकर निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रही है, उसकी जमीनी तस्वीर फिलहाल दावों से काफी पीछे नजर आती है। बाड़मेर-बालोतरा राष्ट्रीय राजमार्ग-25 से सटे बोरावास-कलावा क्षेत्र में विकसित हो रहे इस पेट्रोजोन में दूर-दूर तक रेत के टीले और सीमित बुनियादी ढांचा ही दिखाई देता है।

करीब 449 हेक्टेयर में चार गांवों में प्रस्तावित इस पेट्रोजोन की प्रगति धीमी है। वर्तमान में केवल बोरावास-कलावा के प्रथम चरण में ही कुछ गतिविधियां दिखाई देती हैं, जबकि अन्य क्षेत्र अब भी कागजी प्रक्रियाओं और स्वीकृतियों में उलझे हुए हैं। दावा है कि पेट्रोजोन में 14 प्रकार के पॉलीएथिलीन और 21 प्रकार के पॉलीप्रोपिलीन उत्पादों से जुड़े बड़ी संख्या में उद्योग स्थापित होंगे। जिससे बड़े निवेश और रोजगार सृजन के दावे किए जा रहे हैं।

प्रथम चरण: प्लॉट आवंटन हुआ, सुविधाएं अब भी अधूरी

बोरावास-कलावा के प्रथम चरण में 29.77 हेक्टेयर भूमि पर 75 भूखण्ड चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से लगभग 36 का ही आवंटन हो पाया है। मौके पर हाल ही में सड़क निर्माण और बिजली के खंभे लगाए गए हैं, लेकिन पानी, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट और अन्य आवश्यक सुविधाएं अब भी उपलब्ध नहीं हैं। अधूरा इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशकों के लिए बड़ी बाधा बना हुआ है।

द्वितीय चरण: 257 भूखण्ड प्रस्तावित, काम निविदा तक सीमित

इसी क्षेत्र के द्वितीय चरण में 87.64 हेक्टेयर में 257 भूखण्ड प्रस्तावित हैं। यहां सड़क, बिजली, स्ट्रीट लाइट, डिमार्केशन और साइन बोर्ड जैसी आधारभूत सुविधाओं के लिए अभी निविदा प्रक्रिया ही जारी है। इसके अलावा 97 हेक्टेयर का बोरावास विस्तार क्षेत्र भी फिलहाल सर्वे और सीमा निर्धारण तक सीमित है।

अन्य योजनाएं: कागजों पर प्रगति, जमीन पर इंतजार

सिंधियों की ढाणी (74.47 हेक्टेयर): पर्यावरण स्वीकृति प्रक्रिया जारी
खेमा बाबा नगर (101.65 हेक्टेयर): सर्वे पूरा, सीमा पिलर लगाए जा रहे
वेदरलाई (58.14 हेक्टेयर): पर्यावरण स्वीकृति के लिए निविदा खुली, कार्यादेश लंबित
बोरावास विस्तार (97 हेक्टेयर): सर्वे पूरा, सीमा पिलर लगाए जा रहे

रिफाइनरी से जुड़ी उम्मीदें, लेकिन धीमी रफ्तार चिंता का कारण

पेट्रोजोन का उद्देश्य रिफाइनरी से निकलने वाले कच्चे माल के आधार पर डाउनस्ट्रीम उद्योगों की श्रृंखला विकसित करना है, जिससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर पैदा हो सकें। हालांकि, मौजूदा स्थिति में बुनियादी ढांचे की कमी और धीमी प्रगति इस महत्वाकांक्षी योजना की रफ्तार पर सवाल खड़े कर रही है। ग्राउंड रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि दावों के मुकाबले विकास अभी शुरुआती चरण में ही है। यदि समय रहते बुनियादी सुविधाओं का विकास और प्रक्रियाओं में तेजी नहीं लाई गई, तो निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।