
बाड़मेर। धोरा धरती बाड़मेर के जसोल गांव की एक ढाणी में भारतीय सेना का टैंक रखा जाएगा। ताज्जुब होगा कि यह टैंक यहां क्यों है? इसकी वजह है जसोल के लेफ्टिनेंट जनरल हणूतसिंह। जिन्होंने 1971 के भारत—पाक युद्व में अदम्य साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तान के 48 टैंक की पूरी रेजिमेंट को ही नेस्तनाबूद कर दिया।
भारत ने उनकी वीरता पर महावीर चक्र प्रदान किया था तो पाकिस्तान सेना ने भी उन्हें फख्र—ए—हिन्द कहकर सम्मान दिया। उनकी वीरता का सम्मान करते हुए सेना ने उनके गांव में टैंक भेजा।
जिले के जसोल गांव के हणूतसिंह पूना हॉर्स रेजिमेंट में थे। 1971 के युद्व में पाकिस्तान की 48 टैंक की रेजिमेंट आगे बढ़ रही थी। सामने रणूतसिंह पूना हॉर्स रेजिमेंट को कमांड कर रहे थे जान की परवाह किए बिना आगे बढ़ गए और एक—एक कर पाकिस्तान के सभी 48 टैंक की पूरी रेजिमेंट को ही नस्तेनाबूद कर दिया। पाकिस्तान को जैसे ही यह पता चला कि पूरी टैंक रेजिमेंट खत्म हो गई तो शकरगढ़ पंजाब का इलाका छोड़ फौज पीछे हो गई।
श्रेष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल और संन्यासी
भारतीय सेना के 12 सर्वश्रेष्ठ जनरल में हणूतसिंह का नाम फख्र के साथ भारतीय सेना लेती है। सेेना से 1991 में सेवानिवृत्त होने क बाद वे देहरादून में संन्यास आश्रम में रहे। 11 अप्रेल 2015 को उनका निधन हो गया।
ढाणी में रखा जाएगा टैंक
पूना हॉर्स रेजिमेंट को लेफ्टिनेंट जनरल पर बड़ा गौरव है। रजिमेंट ने उनके पैतृक गांव जसोल में एक टैंक भेजा है। इसको सेना विधिवत यहां रखेगी। सेना के किसी लेफ्निेंट जनरल के गांव में टैंक रखने का यह अनुपम उदारण होगा।
देश का फख्र है
लेफ्टिनेंट जनरल हणूतसिंह देश का फख्र है। उनके अदम्य साहस और वीरता से 1971 से 48 टैंक को नेस्तनाबूद कर दिया।
रावल किशनसिंह हणूतसिंह के भाई
Updated on:
04 Mar 2019 04:18 pm
Published on:
04 Mar 2019 04:15 pm
