
क्या गुड़ामालानी का नया रिसर्च सेंटर बदलेगा राजस्थान के बाजरे की किस्मत? (फोटो- पत्रिका)
Rajasthan Agriculture News: बाड़मेर: बाजरा मतलब पश्चिम राजस्थान…खाने और उपजाने दोनों में देशभर में अव्वल है। बावजूद इसके ताज्जुब होगा कि बाजरे के बीज के लिए आंध्रप्रदेश पर निर्भर है। 36 लाख किलोग्राम बाजरे के बीज की हर साल जरूरत रहती है। राज्य में अभी महज 1000 किलोग्राम ही उपज हो रही है। शेष आंधप्रदेश से आयात होता है।
बाजरे के बीज की पैदावार जायद के मौसम में होती है। जायद का मौसम 15 मार्च से 15 जून तक रहता है। पश्चिमी राजस्थान और समूचे राज्य में इस दौर में बारिश नहीं होती है। तापमान भी 40 से 50 डिग्री में पहुंच जाता है। लू चलने से हवा भी प्रतिकूल रहती है।
इस वजह से यहां बाजरे के बीज का उत्पादन इस मौसम में अनुकूल नहीं हो पाता है। बुवाई में हाइब्रिड बाजरा काम में लिया जाता है, जिसे शंकर नस्ल कहते हैं। यह नर और मादा क्रॉस बुवाई से ही संभव होता है। ऐसे में इस मौसम में बीज तैयार नहीं हो पाते हैं।
आंध्रप्रदेश में मौसम अनुकूल रहता है और आइसोलेशन भी मिल जाता है। इस कारण वहां बाजरे के बीज का उत्पादन बड़ी मात्रा में होता है। आंध्रप्रदेश में मुख्य खाद्यान्न बाजरा नहीं है, लेकिन राजस्थान में बीज की खरीद को देखते हुए यहां किसान बाजरा पैदावार कर इसको बीज के रूप में बेचते हैं।
बाड़मेर के गुड़ामालानी में बाजरा अनुसंधान केंद्र का निर्माण किया गया है। इस अनुसंधान केंद्र के पूर्ण क्रियान्वित होने पर बाजरे के बीज को लेकर बड़ा कार्य होने की उम्मीद है। सूक्ष्म जलवायु की परिस्थिति पैदाकर यहां पर बाजरा बीज उत्पादन की संभावनाएं बनाई जाएगी।
यहां पर बीज का उत्पादन हो तो किसानों को अतिरिक्त आय मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। इससे पहले कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने भी प्रशिक्षण देकर इस पर कार्य प्रारंभ किया, लेकिन आशातीत सफलता नहीं मिली है।
बड़ी मुश्किल मौसम अनुकूलता की है। बाजरा अनुसंधान केंद्र आने के बाद में एक संभावना बनेगी। जहां सूक्ष्म वातावरण देकर किसान बीज उत्पादन को लेकर प्रयोग कर सकते हैं। वैसे यह बहुत ही मुश्किल टास्क मानी जाएगी।
-डॉ. प्रदीप पगारिया, कृषि वैज्ञानिक
Updated on:
26 Mar 2026 02:26 pm
Published on:
26 Mar 2026 02:02 pm
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