
ठेले पर कैर-सांगरी की बिक्री (फोटो-पत्रिका)
बाड़मेर। हरी सब्जियों में रासायनिक खादों के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में पश्चिमी राजस्थान की देशी सब्जी कैर-सांगरी शहरी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। बॉर्डर के गांवों में प्रचुर मात्रा में उगने वाली यह सब्जी अब राजस्थानी थाली की शान से जंप मारकर देशभर के बाजारों में छाई हुई है।
पहले ग्रामीण इसे सुखाकर साल भर इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब शहरी उपभोक्ताओं की पहली पसंद बन जाने से अच्छे दामों में बिकने लगी है। स्थानीय बाजारों में ताजी कैर-सांगरी 200-250 रुपए किलो बिक रही है। बड़े शहरों में 400-500 रुपए दाम हो जाते हैं। सूखी कैर-सांगरी के दाम सालभर 1200-1500 रुपए किलो पर स्थिर रहते हैं।
रासायनिक छिड़काव से भरी सब्जियों के खतरे के बीच कैर-सांगरी पूरी तरह प्राकृतिक है। कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव का दावा किया जा रहा है। इसकी मांग राजस्थान से बाहर अन्य राज्यों तक फैल चुकी है।
जयपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, सूरत, वड़ोदरा समेत देश के प्रमुख शहरों के बाजारों में इसकी मांग है। पहले ग्रामीण इसे सुखाकर 12 माह तक सब्जी के रूप में संग्रहित करते थे, लेकिन आज शहरी मध्यमवर्ग की स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ने इसे ''सुपरफूड'' का दर्जा दे दिया है।
'कैर-सांगरी प्रोटीन, फाइबर और विटामिन्स का खजाना है। ब्लड प्रेशर, शुगर कंट्रोल और कैंसर बचाव में भी अच्छा उपयोग है। रासायनिक मुक्त होने से यह सबसे सुरक्षित विकल्प है। मरीजों को सलाह देता हूं कि सप्ताह में दो बार इसे खाने में शामिल करें।' -डॉ. किशोर चौधरी, बीसीएमओ गडरारोड
गडरारोड के ओनाडा के किसान लखाराम भील बताते हैं कि गांव में कैर झाड़ियां हर तरफ हैं। पहले इसे पशुओं को खिला देते थे या फेंक देते थे। इस बार कैर सांगरी 250 रुपए किलो बिक रही है। पिछले साल कुछ सांगरी सुखाकर रखी थी जिसके 1000-1200 रुपए प्रति किलो दाम मिले।
मिसरी राम, फरसाराम, मथरा राम, खीमाराम मेघवाल, मेहराराम बंजारा के अनुसार उनका पूरा एरिया सूखा क्षेत्र है। कैर-सांगरी कम पानी में उगती है। सुदूर छोटे-छोटे गांवों, ढाणियों से बच्चे, बड़े मिलकर सुबह से शाम तक तोड़कर कैर सांगरी इकट्ठा करते हैं, जिसे बेचने पर अच्छे दाम मिल रहे हैं। अभी देश के बड़े शहरों से सीधे ऑर्डर मिलने से दामों में अच्छी वृद्धि हुई है। इसलिए सभी अच्छी मेहनत करके लाते हैं।
Published on:
30 Mar 2026 06:05 am
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