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सीमावर्ती क्षेत्र में बंद ग्राम खादी के सेंटर अब फिर शुरू होंगे, बन रही ये योजना

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सीमावर्ती क्षेत्र में बंद ग्राम खादी के सेंटर अब फिर शुरू होंगे, बन रही ये योजना

दौरा : सीमावर्ती गांवों में पहुंचे खादी ग्रामोद्योग के मंडल निदेशक
सीमा क्षेत्र में फिर खुलेंगे खादी के बंद सब सेंटर
गडरारोड . सीमावर्ती क्षेत्र में बंद ग्राम खादी के सेंटर अब फिर शुरू होंगे। इस दौरान यहां की कातिनों को आधुनिक चरखे उपलब्ध करवाए जाएंगे। इससे उन्हें बेहतरीन रोजगार उपलब्ध हो पाएगा। पुराने चरखे से जहां 25 दिन में 1 किलो ऊन की कताई होती थी, नहीं नए चरखे से 3 दिन में 1 किलो ऊन की कताई की जा सकेगी। इसके लिए हरसाणी, गडरारोड में खादी उत्पादन केंद्र भी बनाने की योजना है।

खादी ग्रामोद्योग आयोग के मंडल निदेशक बद्री लाल मीणा सोमवार को गूंगा, बैकुंठ ग्राम झिनझिनयाली, हरसाणी व सीमावर्ती गडरारोड दौरे पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बंद ग्राम खादी सेंटर को पुन: शुरू करने के विभाग के प्रस्ताव की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कतीन-बुनकर घर-घर में काम कर रहे हैं। उन्हें सेंटर पर आधुनिक कार्य पद्धति के अनुसार प्रशिक्षित किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने बैकुंठ ग्राम झिनझिनयाली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूरे देश में प्रोडक्शन सेंटर झिनझिनयाली से मुम्बई मुख्यालय कतीन-बुनकर के साथ सीधा संवाद स्थापित करवाया। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के कतीन, बुनकरों को न्यू मॉडल चरखे की कार्यप्रणाली से अवगत करवाना रहा। प्रशिक्षण के बाद पीएमईजीपी से चरखा लेकर स्वयं का लघुउद्योग खड़ा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रस्ताव लेकर हरसाणी, गडरारोड में खादी उत्पादन केंद्र बनाए जाएंगे।

युवा भी आएं आगे : इस दौरान मीणा ने कहा कि युवा भी इस कार्य से जुड़ नि:शुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वरोजगार से जुड़ सकते हैं। वे भारतीय खादी व ग्रामोद्योग सेंटर पर अपना उत्पादन कर सकते हैं। प्रशिक्षण के बाद पीएमईजीपी से चरखा लेकर स्वयं का लघुउद्योग खड़ा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रस्ताव लेकर हरसाणी, गडरारोड में खादी उत्पादन केंद्र बनाए जाएंगे। गांधी जयंती की 150वीं वर्षगांठ पर उनका सपना साकार करने के लिए ग्रामीणों को अधिक से अधिक खादी से जोड़ स्वरोजगार से जोडऩे का लक्ष्य है।