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देर रात तक शराब की बिक्री, जिम्मेदार बन रहे अनजान

- पाबंदी का नहीं असर, दारू की ब्रिकी पर रोक बेअसर पत्रिका स्टिंग का लोगो लगाएं पत्रिका लेट नाइट
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देर रात तक शराब की बिक्री, जिम्मेदार बन रहे अनजान

देर रात तक शराब की बिक्री, जिम्मेदार बन रहे अनजान

बालोतरा. खुले शटर..., दुकानों के आगे ग्राहकों की भीड़..., दुकानों के पास शराबियों का जमावड़ा...। यह नजारा है शहर में स्थित शराब की सरकारी दुकानों का। राज्य सरकार ने रात आठ बजे के बाद प्रदेश में शराब बिक्री पर पाबंदी लगा दी। इस पांबदी की पालना करवाने की जिम्मेदारी आबकारी विभाग व पुलिस के कंधों पर थोपी, लेकिन दोनों ही जिम्मेदार महकमे शराब ठेकेदारों की इस करतूत की तरफ ध्यान नही दे रहे है। शराब ठेकेदार सरकार के नियमों की नहीं, बल्कि स्वयं की ओर से बनाए नियमों के अनुसार शराब की सरकारी दुकानों का संचालन कर रहे है। पत्रिका टीम ने रविवार रात आठ बजे के बाद शहर व आसपास स्थित शराब दुकानों की टोह ली तो पुलिस व आबकारी विभाग के दावों की पोल खुलते जरा भी देर नहीं लगी।

जिम्मेदार बने अनजान-
इस संबंध पत्रिका संवाददाता ने डीएसपी विनोद कुमार से बात की। उनसे देर रात शराब बिक्री की रोकथाम को लेकर जानकारी चाही तो वे अनजान बन गए। वे बोले कहा बिक रही है बताओ कार्रवाई करवाते है। जबकि हकीकत यह है कि पचपदरा रोड व पुराना बस स्टैण्ड मार्ग से हर दिन देर रात तक प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद उन्हें खुली शराब की दुकानें नजर नहीं आना, इनकी कार्यप्रणाली पर धब्बा है।

जितनी देरी, उतना अधिक दाम- इन दुकानों पर शराब के शौकिन दे रात तक आते हैं। इसका फायदा दुकानदार उठाते हैं और अपनी मनमर्जी से दाम तय करते हैं। जानकारी के अनुसार आठ बजे के बाद शराब के तलबदार जितने घंटे देरी से आते हैं, शराब के दाम उतने अधिक बढु जाते हैं। बतौर उदाहरण सौ रुपए की बोतल आठ बजे के बाद सवा सौ रुपए, दस बजे डेढु सौ और देर रात दो सौ-ढाई सौ रुपए में बेची जाती है।

आठ बजे के बाद कमाई बढिया- शराब ठेकेदारों को इस बात का लालच है कि रात आठ बजे के बाद उनकी कमाई ज्यादा होती है। क्योंकि अधिकांश शराबी रात में ही शराब पीते हैं। एेसे में तलब होने पर वे ठेके पर आते हैं और मुंहमांगा दाम चुकाते हैं।

हालात बताने पर हरकत में, नहीं तो शांत- रात आठ बजे के बाद शराब की ब्र्रिकी को लेकर राजस्थान पत्रिका ने पूर्व में कई बार स्टिंग चला पोल खाली है। इसके बाद आबकारी महकमा और पुलिस प्रशासन हरकत में आते हैं और दो-चार दिन तक ठेकेदारों को रात में दुकान नहीं खोलने को पाबंद करते हैं। बात पुरानी होते ही वे भी भूल जाते हैं और फिर वहीं रात आठ बजे के बाद शराब की दुकानें खुलनी शुरू हो जाती है।