
जिले में 5 हजार हैक्टेयर से अधिक भाग में अनार के बगीचे लगे हुए हैं।
धर्मवीर दवे
बालोतरा.
सुनहरा थार इन दिनों सूर्ख लाल हो गया है, इसके बालुई कण मोती की मानिंद चमक रहे हैं। किसान खिलखिला रहे तो खुशी के गीत गा रहे हैं। जिले के एक से दूसरे छोर में अनार के फले फूले बगीचे व भरपूर हुई पैदावार पर यह कहना उचित होगा। नववर्ष की शुरूआत के साथ फसल की आवक शुरू होने से थार में खुशहाली छा गई है।
2010 में सर्वप्रथम जिले के गांव बुड़ीवाड़ा व जागसा के कुछ किसानों ने परम्परागत खेती से नाता तोड़ते हुए नवाचार करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया था, जो अब सही साबित हो रहा है।
वर्ष दर वर्ष बढ़ता रहा क्षेत्रफल - किसानों की मेहनत पर खिले बगीचों को देख अगले वर्ष आसपास के गांवों के अन्य किसानों ने बगीचे लगाने में रुचि दिखाई। इसके बाद यह सिलसिला बढ़ता ही गया। एक अनुमान के तौर पर 2011 में 100 हैक्टेयर, 2012 में 300 हैक्टेयर, 2013 में 1000 हैक्टेयर, 2014 में 2000 हैक्टेयर, 2015 में 3000 हजार हैक्टेयर, 2016 में 4000 हजार हैक्टेयर व 2017 में 5000 हैक्टेयर में अनार के बगीचे लगे। वर्तमान में जिले में 5 हजार हैक्टेयर से अधिक भाग में अनार के बगीचे लगे हुए हैं।
इन गांवों में अनार के बगीचे- जिले में सर्वप्रथम गांव बुड़ीवाड़ा-जागसा में अनार बगीचे लगे थे। इसके बाद गोलिया,मेली, कुंपावास,जेठंतरी, सिलोर, पारलू, मजल, वालियाना, सिणेर, धारणा, मिठौड़ा, पादरू, कांखी, कुण्डल, परेऊ,इन्द्राणा, भाटा, मिठा, बावतरा, दांखा, धनवा, जूना मीठा खेड़ा, भेड़ाणा, गुड़ामालानी, सिंधासवा, उण्डू, काश्मीर, भियाड़, राजमथाई, लंगेरा, बावड़ी सहित 50 से अधिक गांवों में अनार के बगीचे लगे हुए हैं।
बंपर पैदावार,करोड़ों की आय- 2010 में सर्वप्रथम लगाए बगीचों से तीसरे वर्ष 2013 में किसानों को पहली पैदावार मिली थी। इस वर्ष करीब 100 टन पैदावार हुई थी। इसके बाद हर वर्ष पैदावार में बढ़ोतरी होती रही। अनुमान के अनुसार 2014 में 500 टन, 2015 में 2000 हजार टन, 2016 में 7000 हजार टन, 2017 में 14 हजार टन, व इस वर्ष में 20 हजार टन पैदावार होने की संभावना है।
40 हजार रुपए प्रतिटन औसत कीमत होने पर इस वर्ष जिले में करीब 700 से 800 करोड़ रुपए की पैदावार होने की संभावना है।
अच्छी पैदावार व आय- अनार के बगीचा लगाने में शुरूआत में झिझक थी, लेकिन दूसरों को देख बगीचा लगाया। दूसरे वर्ष पैदावार लूंगा। अच्छी पैदावार व आय मिलने पर वर्ष भर की थकान गायब हो जाती है। - गंगासिंह धवेचा, इन्द्राणा
मेहनत का मिलता है दाम- अनार की खेती में मेहनत के साथ खर्चाअधिक आता है। लेकिन मेहनत से अधिक आय होने पर पूरा परिवार खुश है। परम्परागत खेती में मेहनत जितना भी नहीं मिलता है। - नेमाराम चौधरी
अनार जिले के किसानों की पहली पसंद- अनार जिले के किसानों की पहली पसंद बनी हुईहै। हर वर्ष इसका क्षेत्र बढ़ता ही जा रहा है। इस वर्ष 20 हजार टन पैदावार होने की संभावना है। इससे किसानों का जीवन ही बदल गया है। - कल्लाराम चौधरी, प्रगतिशील किसान
Published on:
07 Jan 2018 05:14 pm
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