
बस्सी (जयपुर)। राज्य सरकार ने वाहवाही लूटने के लिए बस्सी उपखण्ड क्षेत्र के बड़वा ग्राम पंचायत मुख्यालय पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को आदर्श का तमगा दे दिया, लेकिन यह सिर्फ नाम तक सीमित रहा। चिकित्सालय में पर्याप्त जगह व चारदीवारी के अभाव, स्थाई चिकित्सक के अभाव में सुविधाएं आदर्श नहीं हो पाई। इससे मरीजों को ही नहीं, बल्कि चिकित्साकर्मियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
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बड़वा पंचायत मुख्यालय पर कई दशक पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को राज्य सरकार ने पिछले साल आदर्श घोषित कर 15 अगस्त 2016 को उद्घाटन किया। बड़वा सहित आस-पास क्षेत्र के लोगों की आस बंधी थी कि यहां भवन समेत अन्य सुविधाओं का विस्तार होगा तो निश्चित रूप से बीमार लोगों को राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
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भवन की सबसे बड़ी समस्या
आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का भवन पुराना होने के कारण जर्जर स्थिति है। बारिश के दिनों में पानी टपकने से परेशानी होती है। केन्द्र पर एक बड़ा हॉल एवं पांच छोटे आकार के कमरे में हैं। केन्द्र प्रशासन ने हॉल में छह के बजाय चार बेड बिछा रखे हैं। इसी के एक हिस्से में डे्रसिंग कार्य किया जाता है। एक हिस्से में गर्भवती महिलाओं की जांच कार्य किया जाता है। इसी तरह एक कमरे में प्रसूति कक्ष बना रखा है। इस कक्ष में ही परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत लगने वाले नसबंदी शिविरों में नसबंदी ऑपरेशन किए जाते हैं। दूसरे कमरे में चिकित्सक कक्ष बनाया हुआ है। तीसरे कक्ष में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना का वितरण केन्द्र बना रखा है। इसी में वैक्सीन के लिए डी-फ्रिज रखे हुए हैं तथा यहीं पर नर्सिंगकर्मी बैठकर अपना कामकाज निपटाते हैं। इसी कमरे को स्टोर बना रखा है। हालत ये है कि दवा रखने के लिए भी पर्याप्त स्थान नहीं है, जिससे उनके खराब होने का अंदेशा बना रहता है। चौथे कमरे को प्रयोगशाला कक्ष बना रखा है। इसमें सभी पन्द्रह प्रकार की जांचों की सुविधा है तथा पांचवें नम्बर के कमरे में आयुर्वेद औषधालय संचालित है, जिसमें आयुर्वेद चिकित्सक मरीजों का उपचार करते हैं।
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डॉक्टर स्थायी ना रजिस्टे्रशन काउंटर
आदर्श स्वास्थ्य केन्द्र में काफी समय से चिकित्सक कार्यरत है, लेकिन यह भी प्रतिनियुक्ति पर हैं। इसके अलावा बड़वा उप स्वास्थ्य केन्द्र, झाझवाड़ व नांगल बोहरा उप स्वास्थ्य केन्द्र में एएनएम ही नहीं हैं, जिससे आदर्श स्वास्थ्य केन्द्र की एएनएम को ही अन्य केन्द्रों का कामकाज संभालना पड़ता है। गंभीर बात ये है कि भर्ती सुविधा बेहतर नहीं होने से गम्भीर रूप से बीमार तो यहां आने के बजाय बस्सी, जयपुर या दौसा की ओर से रुख करते हैं। इधर, रजिस्टे्रशन काउंटर भी नहीं है, जिससे पर्ची काटने में कर्मचारी को परेशानी होती है। कभी वह बरामदे में बैठता है तो कभी चिकित्सक कक्ष के सामने।
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आवास जर्जर, चारदीवारी नहीं
केन्द्र परिसर में बना चिकित्सक का आवास भी पूरी तरह जर्जर है। इसे नकारा भी घोषित किया जा चुका है। उच्चाधिकारियों को भी अवगत करवा रखा है लेकिन इसका पुनर्निर्माण नहीं किया जा रहा है। यदि यह आवास बन जाए तो चिकित्सकों के रुकने से सुविधाओं में सुधार हो सकता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में चारदीवारी नहीं होने से लोगों ने परिसर क्षेत्र से ही आम रास्ता बना रखा है।
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इनका कहना है
बड़वा के आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की भवन संबंधी समस्याओं के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा रखा है। कई बार निदेशालय में भी चिट्ठी भेजी गई हैं। भवन विस्तार के लिए बजट स्वीकृत होते ही इसका निर्माण करवाया जाएगा।
डॉ. दिनेश मीना, बीसीएमओ, बस्सी
भवन पर्याप्त नहीं होने के कारण केन्द्र का कामकाज निपटाने में समस्या होती है। उच्चाधिकारियों को जानकारी दे चुके हैं। चारदीवारी नहीं होने से लोगों ने आम रास्ता बना रखा है।
डॉ. विपिन मीना, आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, बड़वा
Published on:
28 Sept 2017 09:40 pm
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