
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Photo-IANS)
Giriraj Singh: केंद्रीय कपड़ा मंत्री और बिहार के बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह को सोमवार को एक पुराने कानूनी मामले में बेगूसराय की एमपी-एमएलए कोर्ट से राहत मिली है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए उनके चर्चित और कथित विवादित 'दो गज जमीन' वाले बयान से जुड़े मामले में कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत को बरकरार रखा है। इस मामले की सुनवाई के लिए गिरिराज सिंह एक दिवसीय बेगूसराय दौरे के दौरान खुद अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए और सरेंडर किया, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें यह राहत दी।
अदालत परिसर के बाहर भारी संख्या में मौजूद समर्थकों और मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए गिरिराज सिंह बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मामले को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा, 'साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दुर्भावना के तहत मेरे खिलाफ यह मामला दर्ज कराया गया था। विपक्ष और तत्कालीन प्रशासन ने मिलकर मेरे ऊपर ऐसी गंभीर धाराएं लगवाईं, मानो मैं कोई आतंकवादी हूं। एक जनप्रतिनिधि और देश के नागरिक के साथ ऐसा व्यवहार सिर्फ राजनीतिक बदले की भावना से ही किया जा सकता है।'
गिरिराज सिंह ने आगे न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, 'मुझे देश की अदालत और न्याय व्यवस्था पर हमेशा से पूरा भरोसा था और आज भी है। आज जो राहत मिली है, वह सीधे तौर पर सच्चाई और न्याय की जीत है।'
यह पूरा मामला साल 2019 के लोकसभा चुनाव के समय का है। 6 अप्रैल 2019 को बेगूसराय के मशहूर जीडी कॉलेज मैदान में एक विशाल चुनावी जनसभा आयोजित की गई थी, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मंच पर मौजूद थे। आरोप है कि इसी जनसभा में भाषण के दौरान गिरिराज सिंह ने कथित तौर पर मुस्लिमों को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी।
इस भाषण को धार्मिक विद्वेष फैलाने और दंगा भड़काने की कोशिश मानते हुए, तत्कालीन जिलाधिकारी और जिला प्रशासन के निर्देश पर बेगूसराय के नगर थाना में कांड संख्या-221/2019 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई थी। तभी से यह मामला कोर्ट में लंबित था।
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर ने स्थानीय पुलिस की जांच और कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े किए। अधिवक्ता ने अदालत का ध्यान खींचते हुए दलील दी कि पुलिस द्वारा कोर्ट में जो 20 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई है, उसमें से केवल तीन पन्ने ही ओरिजिनल (मूल) कॉपी हैं, जबकि बाकी के सारे 17 पन्ने महज फोटोकॉपी के रूप में संलग्न किए गए हैं।
बचाव पक्ष का यह भी दावा है कि अभियोजन पक्ष अब तक इस मामले में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका है। कथित भाषण की कोई प्रमाणिक रिकॉर्डिंग और सीजर लिस्ट भी रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है। इससे पहले इस मामले की मूल केस डायरी के गायब होने का मुद्दा भी काफी चर्चा में रह चुका है।
अदालत ने जहां एक तरफ गिरिराज सिंह की जमानत को मंजूरी दे दी है, वहीं दूसरी तरफ प्रत्येक सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति से स्थायी छूट देने संबंधी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-205 के तहत दायर किए गए आवेदन पर सुनवाई पूरी कर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार ने कोर्ट को बताया कि केंद्रीय मंत्री होने के नाते गिरिराज सिंह पर कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और राष्ट्रीय दायित्व हैं, जिसके कारण उनका बार-बार अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना व्यावहारिक नहीं है।
Updated on:
01 Jun 2026 04:59 pm
Published on:
01 Jun 2026 04:59 pm
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