
पुलिस की बड़ी लापरवाही (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Chhattisgarh News: बेमेतरा जिले के वार्ड 7 स्थित परशुराम चौक के पास पुलिस प्रशासन की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक बेहद खौफनाक मामला सामने आया है। यहां एक 44 वर्षीय पीड़िता ने अज्ञात कारणों के चलते किराए के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची सिटी कोतवाली पुलिस ने बगैर कमरा खोले, महिला को देखे बगैर, बिना किसी डॉक्टरी जांच, नब्ज टटोले या स्वतंत्र चिकित्सीय पुष्टि के ही महिला को मृत मान लिया।
हद तो तब हो गई जब पुलिस अधिकारियों ने कमरे के बाहर ताला जड़ दिया और मर्ग पंचनामा की कागजी औपचारिकताएं निभाने का हवाला देकर चले गए, जिससे एक जीवित महिला घंटों तक बंद कमरे में बंद रही, जब कमरे से आवाज आई तो दरवाजा खोला गया तब तक रस्सी टूट चुकी थी। महिला किनारे बैठी थी। लोगों के पूछने पर उसने बात भी की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता पिछले करीब 10 वर्षों से अपने तीन बच्चों के साथ बेमेतरा में किराए के मकान में रह रही है। गुरुवार दोपहर करीब 1:30 से 2:30 बजे के बीच जब बच्चे स्कूल से लौटे तो उन्होंने मां को फंदे पर लटका देखा। घबराए बच्चों और परिजनों ने तुरंत मकान मालिक व स्थानीय पुलिस को घटना की सूचना दी ताकि समय पर चिकित्सीय सहायता मिल सके और महिला की जान बचाई जा सके।
सूचना पाकर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। हालांकि परिजनों को उम्मीद थी कि पुलिस तत्परता दिखाते हुए महिला को फंदे से उतारकर तत्काल अस्पताल पहुंचाएगी पर घटनास्थल पर पुलिस बल पहुंची लेकिन किसी भी पुलिसकर्मी ने दरवाजा खोलने की जहमत नहीं उठाई। वहीं रस्सी को टूटी देखकर उसे मृत मान लिया गया। इसके बाद पुलिस दरवाजा पर ताला बंदकर थाने लौट गई।
कमरे में ताला बंद होने के कारण पीड़िता लगभग चार घंटे तक उसी दर्दनाक स्थिति में तड़पती रही। शाम करीब 6 बजे जब अचानक बंद कमरे के भीतर से महिला की आवाज सुनते ही जब परिजनों ने आनन-फानन में ताला खोलकर दरवाजा को धक्का दिया तो अंदर का नजारा हैरान कर देने वाला था। पीड़िता जमीन पर पड़ी थी। उसकी सांसें चल रही थी और वह पूरी तरह होश में थी। उसने होश में बात भी की। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाकर आईसीयू में भर्ती कराया गया।
महिला के जिंदा मिलने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई, जिससे परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने पुलिस की इस अमानवीय लापरवाही के खिलाफ परशुराम चौक पर सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि यदि पुलिस ने समय रहते ताला लगाने की जगह महिला को अस्पताल पहुंचाया होता, तो पीड़िता को घंटों असहनीय मानसिक व शारीरिक पीड़ा का सामना न करना पड़ता। ग्रामीणों ने दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित करने और मामले की निष्पक्ष जांच कर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की।
सोनल ग्वाला, थाना प्रभारी बेमेतरा के मुताबिक, पुलिस को मर्ग की जानकारी मिली थी। पुलिस की मौके पर पहुंची तब दरवाजा खोला था। तब महिला अचेत नजर रही थी इसलिए महिला टीम को लाने के लिए वापस थाना आए थे। वापस पहुंचे तब महिला जीवित मिली, जिसे अस्पताल पहुंचाया गया।
Updated on:
21 Aug 2026 03:22 pm
Published on:
21 Aug 2026 03:22 pm
