
बैतूल. बैतूल जिल के कालापाठा क्षेत्र में रविवार को बेटियों ने सामाजिक परंपरा की बंदिशों को तोड़ते हुए अपने बुजुर्ग पिता की मौत के बाद न केवल उनकी अर्थी को कंधा दिया, बल्कि शमशान तक पहुंचाते हुए बेटे बेटियों की खाई को पाटने का काम किया। यूं कहे कि रुंधे गले और बहते आसुओं के बीच पुरुष प्रधान समाज में बेटियों ने एक उदाहरण पेश कर बता दिया कि बेटा-बेटी समान होते हैं। साबित कर दिया कि बेटे और बेटियां में कोई फर्क नहीं होता है। बेटियों को सामाजिक परंपराओं की बेड़ियों में बंधे रहने की बात अब पुरानी हो गई है। आज की बेटियों ने सामाजिक परम्पराओं की बंदिशों को तोड़ते हुए बेटों को पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है।
बेटियों ने दिया पिता की अर्थी को कांधा
जानकारी के मुताबिक कालापाठा के विकास नगर में रहने वाले को-ऑपरेटिव बैंक ऑडिट ऑफीसर जगदीश प्रसाद सक्सेना का 10 दिसंबर को निधन हो गया था। जगदीश प्रसाद बीते कुछ दिनों से बीमार थे। उनका कोई बेटा नहीं था सिर्फ दो बेटियां हैं। ऐसे में उनके निधन के बाद नाते-रिश्तेदारों और जान पहचान के लोगों को इस बात की चिंता थी कि बेटा न होने के कारण जगदीश प्रसाद को मुखाग्नि कौन देगा। जब ये बात उनकी बेटियों शक्ति और शैलजा को पता चली तो उन्होंने समाज की बंदिशों को दरकिनार करते हुए पिता का अंतिम संस्कार करने की इच्छा जाहिर की। इसके बाद दोनों बेटियां अन्य लोगों के साथ पिता की अर्थी को कांधा देते हुए श्मशान तक ले गईं।
नातिन ने दी मुखाग्नि
जगदीश प्रसाद सक्सेना की अंतिम यात्रा उनके विकास नगर स्थित आवास से मोक्ष धाम तक निकाली गई इस दौरान दोनों बेटियों शक्ति व शैलजा ने उन्हें कांधा देकर बेटा होने का फर्ज निभाया। वहीं श्मशान घाट पर पहुंचने पर नातिन खुशबू और मोना ने जगदीश प्रसाद को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। नातिनों को नाना को मुखाग्नि देते और बेटियों को पिता की अर्थी को कांधा देते जिस किसी ने भी देखा उसकी आंखें नम हो गईं।
Published on:
11 Dec 2022 10:18 pm
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