
Shri Ram Mandir Ayodhya राम मंदिर चढ़ावा केस (फोटो- पत्रिका)
Shri Ram Mandir अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान राशि और चढ़ावा चोरी के मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत और सिफारिश के बाद यूपी की योगी सरकार ने एसआईटी टीम का गठन किया था। टीम ने जांच के बाद कई साक्ष्य जुटाए और इसके बाद टिन्नू यादव सहित आठ लोगों के खिलाफ रामजन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज कराई। आरोपी अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और सुभाष श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया है। श्री राम मंदिर में चढ़ावा चोरी से देशभर में गुस्सा है और आरोपियों को सख्त सजा देने की मांग की जा रही है। अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और कांग्रेस नेताओं ने सभी आरोपियों को फांसी या उम्रकैद जैसा कड़ा दंड देने की बात कही है। हालांकि आरोपियों पर यदि दोष साबित होते हैं तब भी वे सस्ते में ही छूट सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि चोरी के मामले में देश में कानूनन सख्त सजा का प्रावधान ही नहीं है।
श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस न केवल आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है बल्कि अन्य अहम साक्ष्य भी जुटा चुकी है। एसआईटी जांच के दौरान 80 लाख रुपए बरामद भी किए जा चुके हैं।
चढ़ावा चोरों के खिलाफ देशभर में जबर्दस्त नाराजगी है। आम आदमी पार्टी यानि आप के नेता अरविंद केजरीवाल ने कहा है जिन लोगों ने श्रीराम के मंदिर में चोरी की, उन्हें फांसी देनी चाहिए। इधर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव, आरोपियों को आजीवन कारावास देने की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस ने भी श्रीराम मंदिर चोरी के आरोपियों को सख्त सजा देने, उनकी सभी संपत्तियां जब्त करने जैसी मांग की हैं।
राजनैतिक दलों और उनके नेताओं की मांग के विपरीत कानूनविदों का कहना है कि चढ़ावा चोरों का ज्यादा कुछ नहीं बिगड़ेगा। देश के शीर्षस्थ वकीलों में शुमार अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा है कि न तो उनकी प्रापर्टी जब्त होगी और न ही नागरिकता खत्म होगी। इसके लिए उन्होंने देश के कानूनों का हवाला दिया।
अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय के अनुसार न तो प्रीवेंशन आफ करप्शन एक्ट में ऐसी व्यवस्था है और न ही चोरी से संबंधित कानूनों में इसका प्रावधान है। उन्होंने कहा है कि हमारे देश में चोरी का एक ही कानून है- चाहे ट्रेन में चोरी करो, किसी के घर में जाकर चोरी करो या मंदिर में चोरी करो, चाहे 100 रुपए की चोरी करो या 1 करोड की- सजा सबके लिए समान है। चोरों को अधिकतम सजा 5 साल की होगी, इससे ज्यादा कुछ नहीं होगा।
अश्विनी उपाध्याय के अनुसार बीएनएस में सेक्शन 111 में चोरी, डकैती तो लिखी है लेकिन इसमें करप्शन शामिल नहीं है। इसको बदला जाना चाहिए। उन्होंने चोरी से संबंधित कानून सख्त बनाने की मांग, श्रीराम मंदिर की दान राशि चोरी के आरोपियों का नार्को टेस्ट कराने, लाइव ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने और ये जिनका नाम लें उनपर भी केस दर्ज करने की भी मांग की है।
कौन हैं अश्विनी उपाध्याय
अश्विनी उपाध्याय देश के जानेमाने राजनेता और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील हैं। वे भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई से भी जुडे हैं। अश्विनी उपाध्याय ने 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन में शामिल होने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी। वे आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। अश्विनी उपाध्याय देश में विधिक सुधारों के प्रबल समर्थक हैं। उनकी कई याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश जारी किए हैं।
17 मार्च 1975 को जन्मे अश्विनी उपाध्याय जनहित याचिकाएं दाखिल करने के लिए प्रसिद्ध हैं। वे सुप्रीम कोर्ट में करीब 125 जनहित याचिकाए और दिल्ली हाईकोर्ट में 25 जनहित याचिकाएं लगा चुके हैं।
Updated on:
06 Jul 2026 09:23 am
Published on:
06 Jul 2026 09:04 am
