
भरतपुर। कांग्रेस और भाजपा के खेमे की बाड़ेबंदी का जो सच मंगलवार दोपहर मतदान के बाद सामने आया, उसने हर किसी को हैरत में डाल दिया। क्योंकि कांग्रेस के प्रत्याशी अभिजीत कुमार ने 37 मतों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी शिवानी दायमा को करारी शिकस्त दी है। अभिजीत को 65 में से 51 वोट मिले तो शिवानी को 14 मत मिले। माना जा रहा है कि भाजपा के आठ व समर्थित दो पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की है। जब परिणाम सामने आया तो भाजपा के निकाय चुनाव पर्यवेक्षक पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी भी इस सच का सामना करने से बचते नजर आए।
नगर निगम के चुनाव में इस बार भाजपा के 22, निर्दलीय 22, बसपा के तीन व कांग्रेस के 18 पार्षद जीतकर आए थे। 19 नवंबर को मतगणना के बाद से ही दावा किया जा रहा था कि कांग्रेस के जयपुर के जामडोली में बनाए गए कैंप में 50 से अधिक पार्षद शामिल हैं। इसमें भाजपा के भी छह से 10 पार्षदों के शामिल होने की बात सामने आई थी, लेकिन एक दिन पूर्व ही भाजपा नेताओं ने व्हिप जारी कर दो पार्षदों को वापस बुला लिया। सबसे बड़ी बात ये है कि भरतपुर के 25 साल के इतिहास में पहली बार कांग्रेस के हाथ में शहरी सरकार सरकार आई है।
भाजपा की कलह उजागर हुई: विश्वेन्द्र
जीत के बाद केबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने कहा कि भाजपा में प्रदेश स्तर की कलह भरतपुर जिले में भी उजागर हो चुकी है। 25 साल से यहां भाजपा का कब्जा था। हमारे 18 पार्षद जीतकर आए थे, उनके 22 थे। फिर भी हमने 51 वोट लेकर जीत दर्ज की है।
Published on:
26 Nov 2019 08:33 pm
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