
Bharatpur : फोटो - AI
Bharatpur : सरकार हर घर नल से जल पहुंचाने के दावे कर रही है, लेकिन भरतपुर के निकटवर्ती गांव नगला केसरिया की हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े करती है। यहां लोग रात 11 बजे तक इसलिए नहीं सोते कि कहीं पानी के टैंकर से पानी खत्म न हो जाए। टैंकर के गांव पहुंचते ही महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बर्तन लेकर दौड़ पड़ते हैं, क्योंकि उसी पानी से अगले दिन की प्यास बुझानी है।
भरतपुर के निकटवर्ती गांव नगला केसरिया के सरपंच रहे धर्मेन्द्र सिंह उर्फ धर्मो ने पीने के पानी की व्यवस्था अपने निजी टैंकर से कर रखी है। दिनभर अन्य स्थानों पर पानी सप्लाई करने के बाद उनका टैंकर देर रात गांव पहुंचता है। गांव के बीच टैंकर खड़ा होते ही लोग कतार में लग जाते हैं और अपनी बारी आने पर दो-तीन बर्तन पानी भरकर घर ले जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात 11 बजे तक जागना उनकी मजबूरी बन गया है।
विडंबना यह है कि चम्बल परियोजना की मुख्य पाइपलाइन गांव के बिल्कुल नजदीक से गुजर रही है, लेकिन आज तक इसे गांव से नहीं जोड़ा गया। पूर्व सरपंच धर्मेन्द्र सिंह बताते हैं कि उन्होंने अपने स्तर पर पाइपलाइन भी डलवा दी थी, लेकिन सरकारी स्तर पर मुख्य लाइन का कनेक्शन नहीं मिलने से पूरी योजना अधूरी रह गई।
स्थिति और भी गंभीर इसलिए है क्योंकि गांव में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की सबमर्सिबल भी करीब एक महीने से खराब पड़ी है। इससे घरेलू उपयोग के लिए भी पानी का संकट गहरा गया है।
पूर्व सरपंच धर्मेन्द्र सिंह बताते हैं कि मजबूरन लोगों को 300 रुपए का निजी टैंकर मंगवाना पड़ता है। करीब 70 परिवारों की इस बस्ती में अधिकांश घरों को हर महीने तीन टैंकर खरीदने पड़ते हैं, जिससे प्रत्येक परिवार पर लगभग 900 रुपए का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पानी की लाइन गांव के दरवाजे तक पहुंच चुकी है, तब भी घरों तक पानी नहीं पहुंचना प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण है।
भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए जूझ रहे इन परिवारों को अब महज आश्वासन नहीं, बल्कि नलों में पानी चाहिए। पूरा गांव अब सिर्फ उम्मीद पर है कि कब मुख्य लाइन का कनेक्शन जुड़ेगा और पानी समस्या खत्म होगी।
Updated on:
29 Jun 2026 10:04 am
Published on:
29 Jun 2026 10:04 am
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