यह मामला 29 जुलाई 2010 का है, जब भरतपुर जिले के कामां में तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामेश्वर दयाल रोहिल्ला के परिवार पर हमला किया गया था। पुरानी रंजिश के चलते, परसराम, डालचंद, प्रवीण उर्फ लाला और बबलू ने फायरिंग कर जज के पिता खेमचंद रोहिल्ला और भाई गिर्राज प्रसाद की नृशंस हत्या कर दी थी। इस हमले में उनके भाई एडवोकेट राजेंद्र प्रसाद रोहिल्ला, प्रमिला और अंजू भी गोली लगने से घायल हुए थे। इस जघन्य हत्याकांड का मुख्य अभियुक्त प्रवीण उर्फ लाला था, जो घटना के बाद से फरार था।