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सौर ऊर्जा संयंत्र के इंतजार में भरतपुर संभाग के चार हजार किसान

-प्रदेश में अक्टूबर से नहीं लगा कोई संयंत्र, मजबूरन बिजली पर निर्भर सिंचाई व्यवस्था  

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सौर ऊर्जा संयंत्र के इंतजार में भरतपुर संभाग के चार हजार किसान

सौर ऊर्जा संयंत्र के इंतजार में भरतपुर संभाग के चार हजार किसान

भरतपुर. किसानों के लिए बिजली के विकल्प के रूप में सरकार की ओर से शुरू की गई पीएम कुसुम योजना पिछले करीब एक साल से फाइलों में बंद होकर रह गई है। जिसका मुख्य कारण सोलर पैनल के रेट बढ़ जाना माना जा रहा है, जिसके कारण कम्पनियों की ओर से काम करना बंद कर दिया है। ऐसे में इस योजना का लाभ लेना चाहते संभाग के किसान उद्यान विभाग के चक्कर लगाकर परेशान हो रहे हैं, लेकिन अभी तक इसका कोई सकारात्मक परिणान नहीं आया है। जिसके कारण संभाग के चार हजार से अधिक किसान इस योजना से वंचित हैं और उन्हें मजबूरन सिंचाई के लिए बिजली पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
भरतपुर के 431 किसानों ने किए आवेदन
इस योजना के तहत संभाग के चार हजार किसानों के आवेदन अटके पड़े हैं। सबसे अधिक सवाई माधोपुर जिले के 2 हजार किसानों की फाइलें अटकी हुई हैं। इसके अलावा, अलवर जिले के 1200, भरतपुर जिले के 431, करौली के 300 और धौलपुर जिले के 125 किसानों के आवेदन पिछले करीब एक साल से अटके पड़े हैं।
संभाग में 1705 सोलर पंप सेट लगे
किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा आधारित पंप सैट स्थापित करने पर अनुदान दिए जाने का प्रावधान किया गया था। पीएम कुसुम योजना का द्वितीय चरण 2020-21 में शुरू हुआ था और यह योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही थी। इस योजनांतर्गत अलवर जिले में 879, भरतपुर जिले में 282, धौलपुर जिले में 6, करौली जिले में 137 और सवाई माधोपुर में 401 सहित कृषि संभाग भरतपुर में कुल 1705 सोलर पंप सेट की स्थापना किसानों के यहां कराई गई थी।
इनका कहना...
उद्यान विभाग भरतपुर संभाग के संयुक्त निदेशक योगेश कुमार शर्मा के अनुसार पीएम कुसुम योजनांतर्गत सौर ऊर्जा संयंत्र बनाने वाली कंपनियों के टेंडर केन्द्र सरकार स्तर पर एमएनआरई की ओर से किए जाते हैं। द्वितीय चरण 2020-21 में शुरू हुआ था और तदनुसार इसके टेंडर किए गए थे। इसके टेंडरों की अवधि मई 2022 में समाप्त हो रही थी, लेकिन एमएनआरई की ओर से उन्हीं दरों पर काम करने के लिए टेंडरों की अवधि बढ़ा दी गई और कंपनियों की ओर से सितंबर-अक्टूबर 2022 तक काम भी किया गया। इसी दौरान सोलर पैनल के रेट बढ़ जाने के कारण कंपनियों ने काम करना बंद कर दिया। ऐसे में सितम्बर-अक्टूबर से कोई सोलर पंप सेट नहीं लगे।
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