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Hanuman Jayanti: भरतपुर के 5 प्रसिद्ध हनुमान मंदिर, रोकड़िया हनुमानजी लोहागढ़ में कर्ज से मुक्ति की है अनोखी परंपरा

Hanuman Jayanti : भरतपुर सहित पूरे राजस्थान में आज हनुमान जयंती मनाई जा रही है। भरतपुर के 5 फेमस हनुमान मंदिर की रोचक कहानी जानें। इनमें से लोहागढ़ में रोकड़िया हनुमानजी के यहां लगती है कर्ज से मुक्ति की अर्जी। इस अर्जी के बाद कर्ज खत्म हो जाता है।

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भरतपुर. स्टेशन बजारिया स्थित रोकड़िया हनुमानजी। फोटो पत्रिका

Hanuman Jayanti : भरतपुर का लोहागढ़ प्राचीन समय से ही संत-महात्माओं और नागा साधुओं की तपोस्थली रही है। यहां कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं जो आजादी से पहले के हैं, जिनका राजाओं ने समय-समय पर निर्माण और जीर्णोधार करवाया। इन्हीं में से एक है स्टेशन बजरिया स्थित 'श्री श्री 1008 रोकडिया हनुमान मंदिर।

महंत पंडित सुरेश बृजवासी ने बताया कि यह मंदिर करीब 100 वर्ष पुराना है। अब करीब 25 वर्ष से मंदिर से सेवा पूजा संभाल रहे हैं। पूर्व में रियासतकाल के समय पर कई संत-महात्माओं ने हनुमानजी की सेवा की। मंदिर की विशेषता है कि यहां भक्त अपनी आर्थिक तंगी और कर्ज से मुक्ति के लिए हनुमानजी से प्रार्थना करते हैं। इसलिए इनका नाम रोकड़िया हनुमान पड़ा।

दूसरी मान्यता

वहीं दूसरी मान्यता यह भी बताई जाती है कि जब नई मंडी की शुरुआत हुई तो मंडी सहित स्थानीय व्यापारी भी अपने रोकड़ का कुछ हिस्सा हनुमानजी की सेवा में अर्पित करते थे, इसलिए भी इनका नाम रोकड़िया पड़ा। पूर्व दिशा में हनुमानजी का मुख होने के कारण इन्हें सूरजमुखी भी कहा जाता है।

मंगल का विशेष महत्व

यूं तो सभी दिन हनुमानजी की पूजा-अर्चना होती है। लेकिन मंगलवार और शनिवार हनुमानजी का प्रिय दिन है। इस दिन मंदिर में भक्तों की खासी भीड़ होती है। कई भक्त तो विशेष पूजा के लिए हनुमानजी पर चोला और प्रसादी भी चढ़वाते हैं। भक्तजन विशेषकर इन्हीं दिनों में हनुमानजी के सामने कर्ज से मुक्ति के लिए अपनी अर्जी भी लगाते हैं।

इस वर्ष हनुमान जयंती 2 अप्रेल को मनाई जा रही है। चैत्र पूर्णिमा 1 अप्रैल सुबह 7.06 बजे से शुरू होकर 2 अप्रैल सुबह 7.41 बजे तक रहेगी। हिंदू धर्म में सूर्योदय की तिथि सबसे मायने रखती है, इसलिए उत्सव 2 अप्रैल गुरुवार को ही होगा। ज्योतिष के अनुसार इस साल हनुमान जयंती पर चित्रा नक्षत्र और गुरुवार दोनों साथ हैं। साथ ही मंगल ग्रह भी अपनी राशि बदल रहा है, जो ऊर्जा और साहस का प्रतीक है। हनुमान जी शिव के 11वें रुद्र अवतार हैं। पर्व के लिए सबसे प्रार्थना का ठीक समय है अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.45 से दोपहर 12.35।

भरतपुर के अन्य प्रसिद्ध हनुमान मंदिर

लटुरिया वाले हनुमानजी का मंदिर ...

आगरा-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित अभियांत्रिकी कॉलेज के पास स्थित है लटुरिया वाले हनुमानजी का मंदिर। यह मंदिर रियासत की स्थापना से भी अधिक पुराना है। महंत मणिदास महाराज ने बताया कि करीब वर्ष 1700 में यहां रामशरण दास महाराज 15-16 वर्ष की आयु में आए थे। उस समय यहां केवल जंगल ही था।

रामशरण दास महाराज यहां आकर हनुमानजी की सेवा पूजा में लीन हो गए। रिसायत की स्थापना के बाद मंदिर की ख्याति बढ़ गई। निसंतान दंपती यहां आकर हनुमानजी से पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगते थे और पुत्र प्राप्ति के बाद वे यहीं आकर बच्चे की लटुरिया (मुंडन) कराते थे। इसलिए इस मंदिर का नाम लटुरिया वाले हनुमान पड़ा।

पंचमुखी हनुमानजी ...

हनुमानजी का पंचमुखी वह रूप है जब वह राम-लक्ष्मण को अहिरावण से बचाने पाताल लोक गए थे। बताया जाता है कि अहिरावण के प्राण पांच दिशाओं में थे। इसलिए हनुमानजी ने पंचमुखी रूप धारण कर अहिरावण का वध किया और राम-लक्ष्मण के प्राण बचाए। तभी से हनुमानजी के पंचमुखी रूप की पूजा की जाती है। शहर के मथुरा गेट पर पंचमुखी हनुमानजी का मंदिर है जिसका इतिहास शायद ही किसी को पता हो।

मंदिर के महंत पं. हीरालाल शर्मा बताते हैं रियासत काल से पहले की बात है कि एक बार नागा साधुओं की टोली पंचमुखी हनुमानजी की मूर्ति को मुंबई से लेकर यहां होकर गुजर रही थी। उस समय यहां जंगल था। यहां आने के बाद मूर्ति यहां से आगे नहीं बढ़ी तो साधुओं ने मूर्ति को यहीं स्थापित करने का निर्णय लिया।

काले हनुमानजी ...

विश्व में शायद ही कोई ऐसा मंदिर हो जहां आपने हनुमानजी की काली मूर्ति देखी हो। शहर के मुख्य बाजार गंगा मंदिर के पीछे काले हनुमानजी का मंदिर है। इसका इतिहास आज भी शायद ही किसी को पता है। यहां आज भी हनुमानजी को काला चोला चढ़ाया जाता है, केवल उनका मुंह सिंदूरी रंग का होता है।

मंदिर के पुजारी पं. अशोक कुमार शर्मा उर्फ लाला बताते हैं कि लंका दहन के समय हनुमानजी का शरीर काला पड़ गया था। यह काले हनुमानजी उसी समय का स्वरूप है। यह मूर्ति करीब 150 वर्ष पुरानी है।

सिरकी वाले हनुमानजी ...

हनुमानजी की दक्षिणमुखी मूर्ति विरले ही स्थानों पर मिलती है। शहर के अटल बंद अनाज मंडी समीप सिरकी वाले हनुमानजी का मंदिर है। यह स्थान भी नागा साधुओं की देन है। खास बात यह है कि यहां हनुमानजी के बाल रूप से लेकर विराट रूप तक के दर्शन होते हैं। उनके बगल में जो सोटा है वह भी हनुमानजी की मूर्ति की ऊंचाई के बराबर है। इस मूर्ति की ऊंचाई करीब छह फुट है। पं. घनश्याम शर्मा बताते हैं कि मंदिर के बाहर हनुमानजी के पहरेदार के रूप में भैरव नाथ विराजमान हैं।

बागड़ वाले हनुमान ...

किला स्थित बागड़ वाले हनुमानजी के बारे में महंत चंदन स्वामी ने बताया कि वर्ष 1954 में बाबा जयदेव स्वामी काली बगीची स्थित मंदिर पर आए हुए थे। एक दिन वे बिहारीजी के दर्शन करने किले में आए। उन्होंने देखा कि खडियार के पेड़ के नीचे हनुमानजी की मूर्ति थी। उन्होंने इसे अपने ऊपर हनुमानजी की कृपा समझा और यहीं हनुमानजी सेवा करने लगे।

वर्ष 1964 में भुसावर के दुर्गा प्रसाद हेड मास्टर ने यहां एक छोटे से मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर के बगल में ही लकड़ी की टाल है। रियासत काल में यहां हाथियों के लिए गन्ना आदि खाने-पीने की सामग्री रखी जाती थी। उस समय इसे बागड़ कहते थे। मूर्ति के बगल में बागड़ होने से इस मंदिर का नाम बागड़ वाले हनुमान पड़ गया।