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नि:शुल्क दवा, नि:शुल्क जांच के दावों के बीच जनाना अस्पताल में आहत हो रही गर्भवती महिलाएं

भरतपुर . नि:शुल्क दवा। नि:शुल्क जांच। सभी प्रकार की जांच होने के दावे। नई सुविधाओं का विस्तार और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भरमार। यह दावे सरकार हर भाषण में करती नजर आ रही है

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जनाना अस्पताल में जननी के हिस्से दुत्कार ही आ रही है। हाल यह हैं कि गर्भवती महिलाएं सोनोग्राफी कराने को दो-दिन चक्कर लगा रही हैं। इसके बाद भी उन्हें बिना जांच के घर लौटना पड़ रहा है।

भरतपुर . नि:शुल्क दवा। नि:शुल्क जांच। सभी प्रकार की जांच होने के दावे। नई सुविधाओं का विस्तार और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भरमार। यह दावे सरकार हर भाषण में करती नजर आ रही है, लेकिन जमीनी हकीकत में जनाना अस्पताल में जननी के हिस्से दुत्कार ही आ रही है। हाल यह हैं कि गर्भवती महिलाएं सोनोग्राफी कराने को दो-दिन चक्कर लगा रही हैं। इसके बाद भी उन्हें बिना जांच के घर लौटना पड़ रहा है।

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जनाना अस्पताल में उपचार के लिए बड़ी संख्या में हर रोज महिलाएं पहुंचती हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या गर्भवतियों की होती है, लेकिन यहां सोनोग्राफी जांच की सुविधा आधी-अधूरी ही नजर आती है। इसका कारण यह है कि दूरदराज गांवों से आने वाली महिलाएं सुबह 10 बजे तक ही यहां पहुंच पाती हैं। इसके बाद उन्हें पहले ओपीडी का पर्चा लेने के लिए लाइन लगानी पड़ती है। इसके बाद चिकित्सक को दिखाने के लिए कतारों से जूझना पड़ता है। इस प्रक्रिया में ही उनका ज्यादातर समय निकल जाता है। इसके बाद जब वह सोनोग्राफी कराने को लाइन में लगती हैं तो 12 बजते ही उन्हें यहां से सोनोग्राफी जांच बंद होने की बात कहकर टरका दिया जाता है। कई बार महिलाओं के जिद करने पर उनके हिस्से दुत्कार आती है। यह व्यवस्था यहां लंबे समय से चल रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। घड़ी की सुईयों ने जैसे ही 12 बजने के संकेत दिए तो कार्मिक कुर्सी से उठकर बाहर चला गया। ऐसे में यहां दूरदराज से आई महिलाएं गिड़गिड़ाती रहीं, लेकिन किसी ने उनकी सुनवाई नहीं की।

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खड़ी रहते-रहते चक्कर आ गए

मैं सात माह की गर्भवती हूं। मेरे पति बाहर नौकरी करते हैं। मैं बुधवार सुबह 9.30 बजे लाइन में लगी। नंबर आते-आते 12 बज गए। ऐसे में कर्मचारी सीट से उठकर चला गया। लगातार खड़ा होने के कारण चक्कर आने लग गए। ऐसे में पोल के बगल में जाकर बैठ गई। अंदर भी कहने गई, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की।

- रनिया पत्नी रवि कुमार, निवासी कुम्हेर

टोकन तक की नहीं व्यवस्था

मैं आठ माह की गर्भवती हूं। सुबह दस बजे अस्पताल पहुंची। मेरे पति भिवाड़ी में नौकरी करते हैं। ऐसे में मैं अकेली ही आई। दो घंटे लाइन में खड़ी रही, लेकिन सोनोग्राफी कराने का नंबर नहीं आ सका। टोकन भी नहीं दिया, जिससे दूसरे दिन लाइन में नहीं लगना पड़े। कल फिर लाइन में लगना पड़ेगा। पता नहीं कि नंबर आएगा कि नहीं।

- प्रीति पत्नी वीरेन्द्र, निवासी मूडिय़ा जाट

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दो दिन में भी नहीं आया नंबर

मैं सात माह की गर्भवती हूं। सोनोग्राफी कराने के लिए मंगलवार को आई थी, लेकिन नंबर नहीं आने के कारण लौटना पड़ा। बुधवार को फिर यहां पहुंची तो नए सिरे से वही काम करना पड़ा, लेकिन फिर भी नंबर नहीं आ सका। भूखी-प्यासी गर्भवतियों को यहां घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ता है, लेकिन इनके दर्द को कोई नहीं समझता।

- नगीना पत्नी महिपाल, निवासी जघीना