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102 साल की दादी ने दिखाई जिंदगी की जिद, भरतपुर के RBM हॉस्पिटल ने ऐसे रचा इतिहास

RBM Hospital Successful Surgery: 102 साल की रामकटोरी देवी ने गंभीर हिप फ्रेक्चर के बावजूद भरतपुर के RBM अस्पताल में सफल सर्जरी कर जीवन और उम्मीद की मिसाल पेश की। अनुभवी चिकित्सा टीम ने आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता से ऑपरेशन 40 मिनट में पूरा हुआ।

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102 वर्षीय दादी (फोटो: पत्रिका)

Complex Inter-Trochanteric Hip Fracture: जिंदगी के सौ साल पार कर चुकी 102 वर्षीय रामकटोरी देवी ने हिम्मत और उम्मीद की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने आरबीएम अस्पताल के चिकित्सा इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। गिरकर गंभीर रूप से घायल हुई इस वृद्धा का बेहद जटिल इंटर-ट्रोकेन्टरिक हिप फ्रेक्चर था, जिसे सामान्य परिस्थितियों में जोखिमपूर्ण माना जाता है, लेकिन अरबीएम अस्पताल की अनुभवी टीम ने आधुनिक तकनीक, सूझबूझ और सटीक योजना के दम पर इस चुनौती को न केवल स्वीकार किया, बल्कि इसे शानदार सफलता में बदल दिया।

राजकीय आरबीएम अस्पताल में ऑर्थोपेडिक विभाग की टीम ने रामकटोरी का सफल हिप ऑपरेशन कर चिकित्सा जगत को यह संदेश दिया कि उम्र चाहे कितनी भी अधिक हो, सही उपचार और विशेषज्ञता से कठिन से कठिन सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। गिरने के बाद वृद्धा को ऑर्थोपेडिक विभाग में लाया गया, जहां उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए पूरा केस चुनौतीपूर्ण माना गया। सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. योगेश अग्रवाल के नेतृत्व में डॉ. अमित सिंह, डॉ. पराग गुप्ता, डॉ. अमन भारद्वाज सीनियर रेजीडेंट के साथ नर्सिंग ऑफिसर अरविंद और ओटी टीम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।

एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. चन्द्रेश भूषण भारद्वाज के निर्देशन में डॉ. सूरजभान और डॉ. अर्पित ने निश्चेतना संबंधी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। ऑपरेशन में प्रोक्सीमल फेमुर नेल (पीएफएन) तकनीक का उपयोग किया गया, जो कम चीरे वाली आधुनिक विधि है और तेजी से रिकवरी में मदद करती है। मुख्य सर्जन डॉ. योगेश अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक तकनीक और उचित चिकित्सकीय योजना के कारण किसी भी उम्र में सुरक्षित सर्जरी संभव है। वहीं टीम सदस्य डॉ. अमित सिंह ने बताया कि 100 वर्ष से अधिक आयु के मरीज भी यदि समय पर इलाज मिल जाए तो सर्जरी का पूरा लाभ उठा सकते हैं। वृद्धा का ऑपरेशन 40 मिनट में कर दिया गया। निजी अस्पताल में परिजनों को करीब 25 से 30 हजार रुपए खर्च करने पड़ते।

यह बोले परिजन

कभी सोचा नहीं था कि 102 साल की उम्र में भी इतनी बड़ी सर्जरी हो सकेगी। डॉक्टरों ने हमें नई उम्मीद दी है। उनका आत्मविश्वास देखकर ही हम हिम्मत जुटा पाए। हमारे लिए दादी का स्वस्थ होना किसी चमत्कार जैसा है।

यह बोले अस्पताल अधीक्षक

पूरी ऑर्थोपेडिक टीम प्रशंसा की पात्र है। यह उपलब्धि अस्पताल की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं का प्रमाण है। सर्जरी सरकार की स्वास्थ्य योजना के तहत पूरी तरह नि:शुल्क की गई है। आरबीएम अस्पताल लगातार ट्रोमा, ऑर्थोपेडिक और आकस्मिक चिकित्सा में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज कर रहा है।

  • डॉ. नगेन्द्र सिंह भदौरिया, अधीक्षक आरबीएम अस्पताल भरतपुर