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OMG.. 1 लाख मजदूर दो दशक से मांग रहे भिलाई में पीएफ दफ्तर

भिलाई इस्पात संयंत्र, सहायक उद्योगों समेत शहर के विभिन्न संस्थानों में करीब १ लाख से अधिक मजदूर काम करते हैं। इन मजदूरों के पीएफ खाता में थोड़ी भी तकनीकि दिक्कत होने पर रकम अटक जाती है। इसके लिए वे कई बार राजधानी रायपुर का चक्कर काटते हैं। अंत में एजेंटों के माध्यम से उनको यह रकम निकालनी पड़ती है। बीच के एजेंट मजदूरों को लिखा पड़ी के नाम पर रकम वसूल लेते हैं। यूनियन नेता इसको लेकर कई बार मांग कर चुके हैं। पिछले करीब 20 साल से पीएफ कार्यालय भिलाई में खोले जाने की मांग की जा रही है।

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भिलाई

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Abdul Salam

Apr 30, 2024

भिलाई इस्पात संयंत्र, सहायक उद्योगों समेत शहर के विभिन्न संस्थानों में करीब १ लाख से अधिक मजदूर काम करते हैं। इन मजदूरों के पीएफ खाता में थोड़ी भी तकनीकि दिक्कत होने पर रकम अटक जाती है। इसके लिए वे कई बार राजधानी रायपुर का चक्कर काटते हैं। अंत में एजेंटों के माध्यम से उनको यह रकम निकालनी पड़ती है। बीच के एजेंट मजदूरों को लिखा पड़ी के नाम पर रकम वसूल लेते हैं। यूनियन नेता इसको लेकर कई बार मांग कर चुके हैं। पिछले करीब 20 साल से पीएफ कार्यालय भिलाई में खोले जाने की मांग की जा रही है।

ठेकेदार नियमित जमा नहीं करते हैं पीएफ की रकम

बीएसपी के ठेकेदार पीएफ की रकम मजदूरों के पीएफ खातों में महीनों तक जमा नहीं करते। इसके संबंध में मजदूरों को कोई जानकारी तक नहीं होती है। पीएफ दफ्तर भिलाई में शुरू होने से मजदूर सीधे ऑफिस जाकर इसकी जानकारी ले सकेंगे। ठेकेदार भी वक्त पर पीएफ की रकम खाते में डालने को मजबूर हो जाएंगे। इससे व्यवस्था में सुधार हो जाएगा।

यहां है सबसे अधिक मजदूर

छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक मजदूर भिलाई और दुर्ग में है। यहां अकेले भिलाई इस्पात संयंत्र में ही करीब 22,000 से अधिक मजदूर काम कर रहे हैं। इसके अलावा भिलाई के 300 से अधिक उद्योगों में 50,000 से अधिक मजदूर काम करते हैं। वहीं दुर्ग के रसमड़ा और आसपास में भी करीब 125 से अधिक उद्योग हैं, जिसमें भी 20.000 मजदूर काम करते हैं। इसके अलावा विभिन्न संस्थाओं में 30,000 से अधिक पीएफधारी काम करते हैं।

पीएफ के लिए लेते हैं एजेंट का सहारा

मजूदरों को भविष्य निधि की राशि निकाली होती है। तब रायपुर कार्यालय से यह रकम निकलवाने व दस्तावेज में कोई कमी हो, तो उसे पूरा करने के बदले में एजेंट रकम वसूलते हैं। पीएफ कार्यालय, रायपुर में होने की वजह से मजदूर वहां का चक्कर लगाने की जगह जानकार को तलाशते हैं। जानकार सहयोग के नाम पर उनसे तय रकम लेते हैं। एक मजदूर ने बताया कि उसे पीएफ की राशि निकालने के लिए एजेंट को 5,000 रुपए देना पड़ा।

पीएफ ऑफिस हो भिलाई में

संजय साहू, अध्यक्ष, ठेका प्रकोष्ठ, इंटक, बीएसपी ने बताया कि पीएफ ऑफिस, रायपुर में होने से दिक्कत होती है। मजदूरों को बार-बार वहां का चक्कर काटना पड़ता है। भिलाई में भी इसकी शाखा होनी चाहिए।

बीएसपी के पास है खाली भवन

एचएस मिश्रा, कार्यवाहक प्रदेशाध्यक्ष, एचएमएस, बीएसपी ने बताया कि लंबे समय से पीएफ कार्यालय भिलाई में खोलने मांग की जा रही है। बीएसपी के कई दफ्तर खाली हैं, किसी में भी पीएफ दफ्तर खोला जा सकता है।

मांग किया था यूनियन ने

योगेश सोनी, महासचिव, ठेका यूनियन, सीटू ने बताया कि पीएफ दफ्तर, रायपुर जाकर मुख्य अधिकारी से मांग किए थे कि भिलाई में पीएफ कार्यालय खोला जाए। हर ठेका श्रमिक रायपुर जा नहीं सकता।

पीएफ कार्यालय नहीं खुलने से ठेकेदारों को फायदा

विनोद सोनी, महासचिव, एटक, बीएसपी ने बताया कि भिलाई में अब तक पीएफ कार्यालय नहीं खुला है। इससे उद्योगों के ठेकेदारों को फायदा हो रहा है। अधिकारी, शासन ऐसे ही काम करते हैं, जिससे ठेकेदारों को फायदा हो।

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