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जेल जाने से पहले थाने में छोड़ गया था साइकिल, चार साल बाद वापस आया तो नहीं मिली

न्यायालय से सात साल कैद की सजा सुनाए जाने पर दीपक नगर निवासी दीपक महार ने अपनी साइकिल दुर्ग सिटी कोतवाली में रख दिया।
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भिलाई

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Satya Narayan Shukla

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Updated: 23 Jun 2018, 10:19 PM IST

Durg news

जेल जाने से पहले थाने में छोड़ गया था साइकिल, चार साल बाद वापस आया तो नहीं मिली

दुर्ग. न्यायालय से सात साल कैद की सजा सुनाए जाने पर दीपक नगर निवासी दीपक महार (५८ वर्ष) ने अपनी साइकिल को दुर्ग सिटी कोतवाली में रख दिया। उसे यह उम्मीद थी कि उसके जेल से छूटकर आते तक साइकिल थाने में सुरक्षित रहेगी। उसे थाना सबसे सुरक्षित जगह लगा था। चार साल बाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर वह जेल से रिहा हुआ और सीधे थाने में साइकिल लेने आया। थाने में साइकिल को न पाकर वह मायूस हो गया। उसकी साइकिल न तो कबाड़ के ढेर में थी और न ही कंडम हो चुके वाहन और साइकलों की कतार में थी। काफी देर तक ढूंढता रहा पर साइकिल नहीं मिली। उसे सिटी कोतवाली से बैरंग लौटना पड़ा।

जेल से मिले वर्दी में थाना आया

शनिवार को दोपहर लगभग एक बजे जेल से मिले वर्दी में दीपक महार थाना आया। वह थाना परिसर में वाहनों के कबाड़ के ढेर के पास परेशान खड़ा था। तेज धूप के कारण पसीने से तरबतर हो चुका था। कभी कबाड़ की ढेर पर चढ़कर सरिया पाइप व अन्य सामानों को हटाता तो कभी बाइक व साइकिल रखे स्थान को ध्यान से देखता। पूछने पर उसने बताया कि वह चार साल पहले साइकिल थाने में छोड़कर गया था। उसी को खोज रहा है।

उसे हाईकोर्ट से जमानत मिली है

दीपक ने बताया कि शुक्रवार की रात 8 बजे वह जेल से रिहा हुआ। उसे हाईकोर्ट से जमानत मिली है। उसके पास पहने के लिए कपड़े नहीं थे, इसलिए जेल की वर्दी में ही वह बाहर आ गया। वह सीधे साइकिल लेने सिटी कोतवाली पहुंचा, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने यह कहते हुए भगा दिया कि सुबह आकर साइकिल को खोज लेना। उसकी साइकिल कहीं नजर आई। उन्होंने कहा कि वह अपनी साइकिल को जिस हाल में भी होगा देखकर पहचान लेगा। खोजबीन के बाद साइकिल नहीं मिलने पर वह लौट गया।

15 दिसंबर को 2014 को छोड़ गया था
दीपक ने बताया कि उन्होंने १५ दिसंबर २०१४ को साइकिल को थाना परिसर में रखा था। उसका एक आपराधिक प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन था। वह सुनवाई में साइकिल से न्यायालय परिसर पहुंचा था। न्यायालय ने उसे दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई। न्यायालय में उपस्थित पुलिस को मुझे गिरफ्तार कर जेल दाखिल कराने का आदेश दिया। तब जेल जाने से पहले उन्होंने अपनी साइकिल सिटी कोतवाली में छोड़ गया था।

सवाल आखिर साइकिल गई कहा?
आम तौर पर नागरिक सोचते हैं कि थाना परिसर में रखा सामान पुलिस की अभिरक्षा में होता है। वहां रखा हर सामान सुरक्षित रहता है। दीपक ने भी यही सोचकर अपनी साइकिल सिटी कोतवाली परिसर में रखा था। साइकिल के नहीं मिलने पर उसके मन में एक ही सवाल था कि आखिर उसकी साइकिल को थाना से कौन ले गया?