
भिलाई. अखंड सुहाग की कामना करते हुए मंगलवार को सुहागिन महिलाओं ने बरगद के पेड़ पर कलावा लपेटकर वट सावित्री पूजा किया। सुबह से सजी धजी महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए बरगद वृक्ष की समीप एकत्रित हुईं। अलग-अलग देवालयों के परिसर में लगे बरगद पेड़ के पास समूह बनाकर पूजन किया।
इस दिन बरगद के वृक्ष की पूजा करके महिलाएं देवी सावित्री के त्याग, पति प्रेम एवं पति व्रत धर्म का स्मरण करती हैं। यह व्रत स्त्रियों के लिए सौभाग्यवर्धक, पापहारक, दु:ख प्रणाशक और धन-धान्य प्रदान करने वाला होता है। इस व्रत में वट वृक्ष का बहुत महत्व होता है। इस पेड़ की बहुत सारी शाखाएं नीचे की तरफ लटकी हुई होती हैं, जिन्हें देवी सावित्री का रूप माना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु एवं डालियों में त्रिनेत्रधारी शिव का निवास होता है। इसलिए इस वृक्ष की पूजा से सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। अग्नि पुराण के अनुसार बरगद उत्सर्जन को दर्शाता है, अत: संतान प्राप्ति के लिए इच्छुक महिलाएं भी इस व्रत को करती हैं। अपनी विशेषताओं और लंबे जीवन के कारण इस वृक्ष को अनश्वर माना गया है।
वट वृक्ष की छांव में ही देवी सावित्री ने अपने पति को पुन: जीवित किया था। इसी मान्यता के आधार पर स्त्रियां अचल सुहाग की प्राप्ति के लिए इस दिन बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं। देखा जाए, तो इस पर्व के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मिलता है। वृक्ष होंगे, तो पर्यावरण बचा रहेगा और तभी जीवन संभव है। यही भावना के साथ देशभर में आज महिलाएं वट सावित्री पूजा कर रही हैं।दान