
अमरीका-जापान में ड्राइवरलेस कारें (फोटो सोर्स- Getty Images)
CG News: छत्तीसगढ़ के युवा आज दुनिया की सबसे एडवांस ड्राइवर असिस्टेंट सिस्टम यानी 'एडास’ (एडीएएस) को गाइड कर रहे हैं। अमरीका और जापान में चल रही सेल्फ ड्राइविंग ऑटो पायलट कारों की एडास सिस्टम को मशीन लर्निंग के जरिए ट्रेंड करने का काम भिलाई की साफ्टवेयर कंपनी नेक्स्ट वेल्थ को मिला है।
यह कंपनी अमरीका और जापान के शहरों और गांवों की रियल टाइम इमेज प्रोसेसिंग के जरिए सुरक्षित ड्राइविंग की ट्रेनिंग दे रही है। सडक़ों से हर मिनट में आने वाली हजारों-लाखों इमेजेस और वीडियो को प्रोसेस करने के बाद कोडिंग के जरिए एडास को इंसान, जानवर, वस्तु, जीव और निर्जीव वस्तुओं में फर्क सिखा रही है। कार में लगे सिस्टम को बच्चे की तरह बार-बार एक ही चीज सिखाने का काम भिलाई के युवा इंजीनियर्स कर रहे हैं।
एडास सिस्टम एल्गोरिदम पर काम करता है। यदि सेल्फ ड्राइविंग कार को ऑटो पार्क होना है तो पहले सिस्टम को पार्किंग का पूरा मॉड्यूल समझाना होगा। जैसे पार्किंग का यलो बॉक्स, पहले से खड़ी कारें पार्किंग की लंबाई-चौड़ाई सब कुछ पहले से फीड रहेगा। यानी पार्किंग की कमांड देते ही कार का सीपीयू माइक्रो सेकंड में ही इमेज को याद कर लेता है। यह सबकुछ इमेज और बैंक एंड में की गई प्रोग्रामिंग के जरिए संभव हो पाता है। एक बार मशीन सीख जाती है, फिर हर पार्किंग में वह खुद ही सारे मेजरमेंट कर लेती है।
अमरीका और जापान से भिलाई की सॉफ्टवेयर कंपनी को इमेज व वीडियो भेज रहे हैं। कंपनी के इंजीनियर्स 2डी और 3डी बॉन्डिंग बॉक्स तैयार रहे हैं। यानी यदि सड़क पर कोई कार खड़ी है तो उसके चारों और लाल रंग का घेरा तैयार हो रहा है। इसके बाद बॉक्स को टैग किया जाएगा। इस टैग और रेड बॉक्स के जरिए ही एडास सिस्टम पहचान पाएगा कि आगे सडक़ पर एक कार खड़ी है, जिससे सुरक्षित दूरी बनाते हुए निकलना होगा।
नेक्स्ट वेल्थ मुख्य तौर पर बेंगलूरु की कंपनी है, जिसे छत्तीसगढ़ के युवाओं ने शुरू किया है। कंपनी के फाउंडर सोमेश शर्मा का कहना है कि छोटे शहरों में संभावनाओं की कमी नहीं है। कंपनी का मुख्यालय बेंगलूरु है, लेकिन ज्यादातर कामकाज भिलाई ऑफिस से ही होता है।
अमरीका और जापान में बैठे लोग भिलाई की इस सॉफ्टवेयर कंपनी को इमेज व वीडियो भेज रहे हैं। इसके बाद कंपनी के इंजीनियर्स 2डी और 3डी बॉन्डिंग बॉक्स तैयार रहे हैं। यानी यदि सड़क पर कोई कार खड़ी है तो उसके चारों और लाल रंग का घेरा तैयार हो रहा है। इसके बाद उस बॉक्स को टैग किया जाएगा।
इस टैग और रेड बॉक्स के जरिए ही एडास सिस्टम पहचान पाएगा कि आगे सड़क पर एक कार खड़ी है, जिससे सुरक्षित दूरी बनाते हुए निकलना होगा। एडास सिस्टम को रास्ते में आ रहे इंसान, कार, बस, ट्रक, ट्रैफिक सिग्नल जैसे लाखों ऑब्जेक्ट्स समझाने का काम ही भिलाई की कंपनी कर रही है। इसके बाद भिलाई के इंजीनियर्स पूरा डेटा अमरीकी कंपनी को भेज देते हैं।
Updated on:
21 Aug 2025 10:11 am
Published on:
21 Aug 2025 10:09 am
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