बघेरा निवासी नीरा साहू ने बताया कि हलषष्ठी पर्व पर महिलाएं व्रत पूरा करने के बाद बिना हल चले हुए जमीन से उपजे अनाज (पसहर चावल) का सेवन करेंगी। इस व्रत में गाय के दूध, दही, घी का सेवन करना भी मना है। इसलिए इस दिन भैंस के दूध, दही, घी का सेवन किया जाता है। छत्तीसगढ़ में कमरछठ के दिन हल को छूना तो दूर हल चली जमीन पर भी महिलाएं पैर नहीं रखती और हल चले अनाज को भी ग्रहण नहीं करती।