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CG Education: अब पुराने छात्र लेंगे नए विद्यार्थियों की क्लास, नई परंपरा की हुई शुरुआत

CG Education: कॉलेज में इसके लिए गेस्ट लेक्चरर की व्यवस्था बनाई गई है। इस परंपरा की शुरुआत कॉलेज के भूगर्भशास्त्र विभाग से की गई है, जहां भूगर्भशास्त्र के विभिन्न विषयों की जानकारी नए विद्यार्थियों को दी जा रही है।

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भिलाई

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Love Sonkar

Dec 03, 2024

CG Education

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CG Education: साइंस कॉलेज दुर्ग में सीखने-सिखाने की नई परंपरा की शुरुआत हुई है। निजी और शासकीय उपक्रमों में उच्च पदों पर खुद को स्थापित कर चुके कॉलेज के भूतपूर्व छात्र (एलुमनी) कॉलेज के नए विद्यार्थियों की कक्षाएं ले रहे हैं।

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कॉलेज में इसके लिए गेस्ट लेक्चरर की व्यवस्था बनाई गई है। इस परंपरा की शुरुआत कॉलेज के भूगर्भशास्त्र विभाग से की गई है, जहां भूगर्भशास्त्र के विभिन्न विषयों की जानकारी नए विद्यार्थियों को दी जा रही है। यह एलुमनी खदानों, कारखानों, स्मेल्टर, इस्पात संयंत्रों आदि में उपयोग की जाने वाली लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

सबसे खास बात यह है कि, यह कोई एक दिन का व्याख्यान नहीं है, बल्कि इसे लगातार किया जा रहा है। वैसे तो साइंस कॉलेज गेस्ट लेक्चरार को कक्षाओं के लिए भुगतान करता है, लेकिन कॉलेज के यह एलुमनी बिना किसी मानदेय और यात्रा भत्ता लिए विभिन्न शहरों से आकर कक्षाएं ले रहे हैं।

साइंस कॉलेज दुर्ग के विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीनिवास डी. देशमुख ने कहा भूगर्भशास्त्र विभाग में विभिन्न केन्द्र एवं राज्य सरकार के प्रतिष्ठानों में उच्च पदों पर आसीन एलुमनी महाविद्यालय आकर यूजी और पीजी के विद्यार्थियों को विषयों की नई जानकारी गेस्ट लेक्चर के रूप में दे रहे हैं। वे दूसरे शहरों और राज्यों से कॉलेज पहुंचकर कक्षाएं लेते हैं। इसके लिए यात्रा भत्ता या पारिश्रमिक भी नहीं लेते।

समझा रहे नए रास्ते और विकल्प

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए विद्यार्थियों के पास अवसरों की भरमार है। इसी कड़ी में एलुमनी विद्यार्थियों से अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। वे ग्रेजुएशन के बाद खुलने वाले रास्ते नए विद्यार्थियों को समझा रहे हैं। माइनिंग से लेकर सीमेंट संयंत्र और जियोलॉजिकल सेक्टर जैसे दर्जनों विकल्प साझा कर रहे हैं। इनमें नौकरियों के लिए जरूरी स्किल और तैयारी की जानकारी भी नए विद्यार्थियों को दी जा रही है।

क्यों फायदेमंद है यह प्रयास

साइंस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि इसका फायदा विद्यार्थियाें को नई टेक्नोलॉजी से जुड़कर होगा। इस समय इंडस्ट्री, माइनिंग सेक्टर में बदलाव हो रहे हैं। जिसके बारे में विद्यार्थियों को जानना बेहद जरूर है। उन्हें इंडस्ट्री रेडी बनाने के लिए एलुमनी की शुरू की गई यह परंपरा उन्हें नई समझ से रूबरू कराएगी।

भूगर्भशास्त्र के क्षेत्र में आ रही नई टेक्नोलॉजी के बारे में समझने का मौका मिलेगा। धीरे-धीरे साइंस कॉलेज इस परंपरा से सभी विषयों को जोड़ेगा। इस समय सैकड़ाें की तादाद में कॉलेज के ऐसे एलुमनी हैं जो विभिन्न सेक्टर्स की हाई पोस्ट पर काम कर रहे हैं। कॉलेज अपने एलुमनी से संपर्क करने में लगा हुआ है। जल्द ही शेष विषय भी इसमें शामिल होंगे।