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45 डिग्री तापमान में लगातार 7 घंटे उड़ान भरने में माहिर हैं कबूतर, पढि़ए पूरी खबर

लंबी उड़ान भर कर पदक जीतने वाले 125 कबूतरों की चोरी के मामले में पुलिस ने नागपुर और रायपुर से पांच लोगों को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया है।

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Theft of Pigeons

भिलाई. प्रतियोगिताओं में लंबी उड़ान भर कर पदक जीतने वाले १२५ कबूतरों की चोरी के मामले में पुलिस ने नागपुर और रायपुर से पांच लोगों को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया है। इनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द मामले का खुलासा हो जाएगा। पद्नाभपुर चौकी पुलिस ने गुुरुवार को बताया कि क्राइम ब्रांच की एक टीम कबूतर चोरों की तलाश में रायपुर और नागपुर रवाना हुई थी। मुखबिरों से सूचना मिली थी कि कबूतर चोरों को रायपुर और नागपुर की ओर जाते देखा गया है।

125 चैम्पियन कबूतर चोरी हो गए थे

गौरतलब है कि बुधवार को दुर्ग के पक्षी प्रेमी मालिक रथिन्द्र नाथ मायती (राजू बंगाली) के घर के छत पर बने पक्षियों के आशियाने से करीब 125 चैम्पियन कबूतर चोरी हो गए थे। चोरी हुए सभी कबूतर छत्तीसगढ़ में कबूतर प्रतियोगिता के चैम्पियन हैं। इन कबूतरों की बदौलत ही अब तक कई पदक और ईनाम की राशि हासिल की गई है। राजू बंगाली विगत 30 साल से प्रतियोगिता में लगातार विजेता रह चुके हैं। मई और जून में भी कबूतर की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता है जिसमें इन कबूतरों को हिस्सा लेना था। प्रार्थी राजू को शक है कि प्रतियोगिता की वजह से ही जानबूझकर उनके कबूतरों की चोरी की गई है। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल हैदराबाद में डीआईजी अजय भारतंग ने प्रार्थी राजू को 25 से अधिक अच्छी नस्ल के कबूतर भेंट किए हैं। इसलिए उन्होंने कबूतरों के पैरों पर डीआईजी लिखा हुआ टैग भी लगा रखा है। उन कबूतरों में से भी 10 से अधिक टैग लगे कबूतर चोरी हुए हैं।


जो जितनी देर आसमान में वही बनेगा विजेता
कबूतर उड़ान प्रतियोगिता बेहद खास होती है। इनके नियम भी सख्त होते हैं। कबूतरों को २-४-६ के हिस्सों मेें उड़ान के लिए सुबह ७ बजे छोड़ा जाता है। सुपेला के एक और कबूतरबाजी के शौकीन संत वर्मा ने बताया प्रतियोगिता की पारदर्शिता के लिए अलग-अलग जगहों से अंपायर को बुलाया जाता है। जैसे भिलाई में होने वाली प्रतियोगिता में जबलपुर, इंदौर, रायपुर से अंपायर आते हैं। एक बार उडऩे के बाद यदि कबूतर पुन: मचान पर आकर या १०० फीट के दायरे पर बैठ जाए तो उसे स्पर्धा से बाहर मान लिया जाता है। कबूतर को लगातार ७ से ८ घंटे तक उडऩा होता है।जो कबूतर जितनी देर तक उड़ता है उसका समय नोट कर निर्णय किया जाता है। पहचान के लिए कबूतर के परों पर सील निशान लगाया जाता है। इससे कबूरतरों की पहचान आसानी से हो जाती है।

13 मई से शुरू होगी कबूतरबाजी
कबूतरबाजी एक जुमला बन गया हो। मुगलकाल, नवाबों और जागीरदारों के समय से चली आ रही कबूतरबाजी की परंपरा खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है, लेकिन छत्तीसगढ़ में दुर्ग-भिलाई से रायपुर तक कबूतर पालने का शौक आज भी है। हर साल चिलचिलाती गर्मी में मई माह से जून तक प्रतियोगिता होती है। इस बार छत्तीसगढ़ कबूतर उड़ान प्रतियोगिता १३ मई से शुरू होगी।

13 मई 20 मई,27 मई को दो स्पर्धा

छत्तीसगढ़ यूथ स्तरीय कबूतर उड़ान प्रतियोगिता के अध्यक्ष लाला भाई ने बताया कि इस सीजन ५ प्रतियोगिता होगी। १३ मई, २० मई, २७ मई को दो स्पर्धा और ३ जून शामिल है। ८०-९० प्रतियोगी टूर्नामेंट में भाग लेने आते हैं। जिसमें प्रदेश के अन्य शहरों के अलावा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिसा राज्य से कबूतरबाज शामिल होते हैं।

ये पांच प्रजाति हैं खास

इन कबूतरों की कई प्रजातियां हैं, जिनमें 5 बहुत खास मानी जाती हैं। 1. कागदी कबूतर 2. नीलेह्यूमर कबूतर 3. कावरा कबूतर 4. खाल कबूतर 5. सराजी कबूतर। इसके अलावा काबूरबाजी के शौकिनों की अपनी अलग जुबान होती है, जिनसे इनकी नस्ल से पहचाना जाता है।सिकरे, चीने, हरे, मुक्के, अवलक, मकौया है। इसमें आंध्रप्रदेश और मद्रासी कबूतरों को सबसे अच्छा मना जाता है।

ऑटो चालक लाला २० साल से पाल रहे कबूतर
सुपेला लक्ष्मी नगर निवासी लालाभाई पैसे से ऑटो चालक है। १५ साल की उम्र से कबूतर पालने के शोक से जुटे हैं। इनके पास करीब ५० कबूतर है। जिन्हें वह बच्चों की तरह परवरिश करते हैं। भिलाई-दुर्ग में करीब २०-३० लोग बेहदस्तर पर कबूतर को पालते हैं। अन्य जगह होने वाली प्रतियोगिता में भाग लेते हैं।

कुवैत व ओमान से आते हैं हर साल शौक
कबूतरबाजी का शौक शहर से विदेश चले गए शौकीनों को हर साल खींच लाता है। भिलाई के नाजीर हुसैन खान कुवैत में रहते हैं। मई से जून माह वे यहां आते हैं। ऐसे ही अजूल खान ओमान में रहते हैं लेकिन स्पर्धा में भाग लेने हर साल आते हैं।

21 हजार नगद और बाइक, फ्रीज इनाम
भिलाई में १३ मई को होने वाली प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार ११,००० रुपए। २० मई को प्रथम पुरस्कार बाइक, द्वितीय बाइक, तृतीय फ्रीज रखा है। २७ मई की प्रतियोगिता में २१,००० प्रथम पुरस्कार, ३ जून की प्रतियोगिता में भी ऐसे ही पुरस्कार रखे हंै। विजेता को कप, सील्ड दी जाती है।

उड़ान के पहले खिलाते हैं पिस्ता-बादाम
लाला बताते हैं उड़ान के एक दिन पूर्व पिस्ता, बादाम, मुन्नका, पोस्त का दाना, छोटी इलायची, बंसलोचन को पीसकर गोली के रूप में कबूतर को खिलाने से ड़ान शक्ति में इजाफा किया जा सकता है। उड़ान वाले दिन सादा पानी दिया जाता है। रोज की खुराक में ज्वार, बाजरा, मक्का, बादाम रोटी में मिक्स कर दिया जता है।

इस तरह दी जाती है कबूतरों को ट्रेनिंग
कबूतर जिस घर को पहचान लेता है, उसे ताउम्र छोड़ता नहीं है। प्रतियोगिता से पहले उसे कड़े प्रशिक्षण से गुजरना होता है। दो महीने के बच्चे से ट्रेनिंग की शुरुआत होती है। उसे लगातार उडऩे के लिए प्रेरित किया जाता है।