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एनजीटी की दखल : शिवनाथ को प्रदूषण से बचाने बनेगा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

patrika bhilai news छत्तीसगढ़ की पांच जीवनदायिनी नदियां शिवनाथ, हसदेव, खारून, महानदी और केलो का पानी जहर बनता जा रहा है। जांच में पाया गया है कि इन नदियों के पानी में एसिड की मात्र लगातार बढ़ रही है। जिससे ऑक्सीजन घटती जा रही है। इसके चलते दुर्ग समेत प्रदेश के 10 जिलों में 311.2 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी तैयार किए जाएंगे। इसके तैयारी शुरू हो गई है।

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प्रदेश की अन्य नदियों को भी प्रदूषण से बचाने 11 जिलों में तैयार होंगे 311.2 एमएलडी के एसटीपी

शिवनाथ नदी

भिलाई. छत्तीसगढ़ की पांच जीवनदायिनी नदियां शिवनाथ, हसदेव, खारून, महानदी और केलो का पानी जहर बनता जा रहा है। जांच में पाया गया है कि इन नदियों के पानी में एसिड की मात्र लगातार बढ़ रही है। जिससे ऑक्सीजन घटती जा रही है। इसके चलते दुर्ग समेत प्रदेश के 10 जिलों में 311.2 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी तैयार किए जाएंगे। इसके तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश की नदियों के प्रदूषण का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) तक पहुंच गया है। इसके चलते प्रत्येक बैठक में एनजीटी नदियों का प्रदूषण रोकने के लिए शासन से जवाब तलब करती है। हाल ही में बैठक के बाद शासन ने जिन जिलों में एसटीपी नहीं है, उनकी प्रस्तावित लिस्ट एनजीटी को भेजी है, जिसमें बताया गया कि रायपुर समेत 11 जिलों में 87.8 एमएलडी क्षमता के एसटीपी अंडर कंस्ट्रक्शन है। जबकि 311.2 एमएलडी के एसटीपी दुर्ग समेत 10 जिलों में बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसमें कुल 225 एमएलडी क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट जिले की चार निकाय में बनाए जाएंगे।

पांचों नदियों में लगातार कम हो रहा ऑक्सीजन लेवल कम
छत्तीसगढ़ की शिवनाथ नदी दुर्ग जिला, बलौदाबाजार व भाटापारा जिला, हसदेव कोरबा जिला, खारून नदी रायपुर जिला, महानदी कांकेर, धमतरी गरियाबंद जिला और केलो नदी रायगढ़ जिले के लोगों के लिए जीवनदायिनी है। रिपोर्ट के मुताबिक शिवनाथ, हसदेव, खारून और केलो नदियों के पानी में प्रति लीटर पर सात मिलीग्राम या उससे अधिक होना चाहिए था। जांच में ऑक्सीजन लेवल कम मिला है। मानक के अनुसार, इसे छह मिलीग्राम तक रहना चाहिए। इसके बाद ही एनजीटी ने मामले को संज्ञान में लेकर राज्य शासन को वाटर वेस्ट मैनेजमेंट के तहत काम करने का आदेश दिया था। इसके बाद से लगातार सुनवाई भी कर रही है।

नदियों के पानी में कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया की काफी भरमार
रिपोर्ट के मुताबकि प्रदेश की पांचों नदियों में कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया की अधिकतम संख्या भी हानिकारक स्तर के ऊपर है। पर्यावरणविदों का कहना है कि मानक के अनुसार प्रति 100 मिलीलीटर में अधिकतम 50 कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया हो सकते हैं लेकिन नदियों में कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया 46 से 350 तक पाए गए हैं। ऐसे में इस पानी के सेवन से कमजोरी, अल्सर, अपचय, पेट में मरोड़ की समस्या होती है।

पानी में लगातार बढ़ रहा पीएच
रिपोर्ट के मुताबकि कि पानी में हाइड्रोजन की संभावना (पीएच) लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हाइड्रोजन की मात्रा अधिकतम सीमा के नजदीक पहुंच गई है। विशेषज्ञों की मानें तो पानी में हाइड्रोजन की मात्र न्यूनतम 6.5 और अधिकतम 8.5 होनी चाहिए। लेकिन रिपोर्ट कहती है कि पांचों नदियों के पानी की पीएच यूनिट सात को भी पार कर चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाइड्रोजन की मात्रा बढऩे का मतलब है कि पानी में एसिड बढ़ रहा है, जो मानव शरीर के लिए काफी नुकसानदेह होती है।

भिलाई में सबसे अधिक क्षमता वाला 100 एमएलडी का बनेगा एसटीपी
दुर्ग जिले के भिलाई निगम क्षेत्र में 100 एमएलडी का एसटीपी बनाया जाएगा। जो सबसे अधिक क्षमता वाला होगा। निगम क्षेत्र की बड़ी आबादी होने की वजह से भिलाई नगर निगम में बड़ा एसटीपी बनाने का फैसला लिया है। खारून नदी के किनारे बसे कुम्हारी नगर पालिक क्षेत्र में 80 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा। दुर्ग निगम क्षेत्र में 60 एमएलडी और रिसाली निगम क्षेत्र में 15 एमएलडी का प्लांट बनाया जाएगा।

कुम्हारी में जिले अन्य निकायों से जल्दी तैयार होगा एसटीपी
कुम्हारी, शक्ति, शिवरीनारायण, दंतेवाड़ा व चंद्रपुर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार करने के लिए प्रशानिक स्वीकृति मिल गई है। कुम्हारी में जिले के अन्य निकायों की अपेक्षा जल्दी निर्माण शुरू हो जाएगा।

इन विभागों को जिम्मेदारी
नदियों के प्रदूषण मामले में एनजीटी के आगे आने के बाद सरकार ने नदियों के पुनुद्धार की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायत, नगर तथा ग्राम निवेश विभाग, वन विभाग, सिंचाई विभाग, उद्योग विभाग को सौंपा है।