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रिश्वतखोर बिजली कंपनी के सब इंजीनियर और तहसीलदार के रीडर को मिली कारावास की सजा

दो कोर्ट ने गुरुवार को बिजली कंपनी के सब इंजीनियर विजय खरे और भिलाई नायब तहसीलदार के रीडर खिलावन वर्मा को रिश्वत लेने का दोषी ठहराया।

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रायनगर में 19 साल पूर्व हुए दोहरा हत्याकाण्ड में बुधवार को नौ जनों को दोषी मनाते आजीवन कारावास की सजा सुनाई

दुर्ग . भ्रष्टाचार से संबंधित प्रकरणों में दो कोर्ट ने गुरुवार को अलग अलग फैसला सुनाया। स्पेशल जज मधुसूदन चंद्राकर ने जामगांव एम (पाटन) विद्युत वितरण केन्द्र के तत्कालीन सब इंजीनियर विजय खरे (51 साल) और न्यायाधीश गरिमा शर्मा ने भिलाई नगर के तत्कालीन नायब तहसीलदार बीबी पंचभाई के रीडर खिलावन सिंह वर्मा (47 साल) को रिश्वत की मांग करने और लेने का दोषी ठहराया। दोनों आरोपियों को क्रमश: दो-दो वर्ष और तीन-तीन वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही दोनों धाराओं के तहत आरोपी सब इंजीनियर को कुल 10 हजार और रीडर पर कुल 50 हजार रुपए जुर्माना किया है।

अभियोग पत्र क्रमश: दो सौ व ढाई सौ पृष्ठ में था

फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों आरोपियों ने न्यायालय में यह कहते हुए जमानत आवेदन प्रस्तुत किया कि वे फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देना चाहते हैं। कारावास की सजा चार साल से कम होने के कारण न्यायालय ने दोनों आरोपियों का जमानत आवेदन को स्वीकार करते हुए रिहाई का आदेश दिया। खास बात यह है कि एसीबी ने दोनो ही प्रकरण वर्ष 2009 में दर्जकर अभियोग पत्र वर्ष 2012 में प्रस्तुत किया था। अभियोग पत्र क्रमश: दो सौ व ढाई सौ पृष्ठ में था।

बिजली कनेक्शन के लिए मांगे थे घूस
विशेष लोक अभियोजक केडी त्रिपाठी ने बताया कि ग्राम अखरा (पाटन निवासी) नंदकुमार साहू ने खेत में दो बोर कराया था। कृषि कार्य के लिए वह स्थाई विद्युत कनेक्शन लेने दस्तावेज के साथ विद्युत वितरण केन्द्र में आवेदन प्रस्तुत किया था। दस्तावेज पूर्ण होने के बाद सहायक अभियंता विजय कुमार खरे ने 10 हजार रुपए का डिमांड किया था। नंदकुमार ने रिश्वत मांगने वाले अधिकारी के खिलाफ रायपुर पहुंचकर शिकायत की थी।

रिश्वत रकम में से 500 नास्ता के लिए लौटा दिया
एसीबी के अधिकारियों ने प्रार्थी द्वारा उपलब्ध क राए 500 के 10 नोट पर पहले केमिकल लगाया। फिर उसी नोट को प्रार्थी को सहायक अभियंता को देने कहा। नंदकुमार 31 अक्टूबर 2009 की सुबह अम्लेश्वर कालोनी स्थित सहायक अभियंता के निवास पहुंचकर रिश्वत दी। पांच हजार रुपए गिनने के बाद आरोपी ने 500 रुपए का एक नोट यह कहते हुए लौटा दिया था कि चाय नास्ता कर लेना। नंदकुमार के ईशारा मिलते ही एसीबी ने रेड कर घूस की रकम को शर्ट की जेब से बरामद कर एफआईआर की।

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नामांतरण करावने के नाम पर पांच हजार की मांग
विशेष लोक अभियोजक विजय कसार ने बताया कि सेक्टर पांच निवासी राकेश कुमार पोद्दार ने कोहका निवासी चंदाबाई से 2700 वर्गफीट जमीन खरीदा था। रजिस्ट्री पेपर गुम होने के कारण वह जमीन का नामंतरण नहीं करा पा रहा था। रजिस्ट्री कार्यालय से सत्य प्रतिलिपि लेने के बाद वह नगर पालिक निगम परिसर स्थित तहसील कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। नामंतरण कराने के नाम पर नायब तहसीलदार के रीडर खिलावन सिंह वर्मा(सहायक ग्रेड ३) ने पांच हजार रिश्वत की मांग की थी।

कॉफी हाऊस में नोटो पर लगाया गया केमिकल
30 सिंतबर को एसीबी के अधिकारी रेड करने पहुंचे थे। वे इंडियन कॉफी हाउस के कमरा नंबर १०९ में पहले पीडि़त को बुलाया उसके बाद उपलब्ध कराए गए नोट पर केमकल लगाकर निगम परिसर भेजा गया। राकेश जब स्कूटर से तहसील ऑफिस पहुंचा तो रीडर बाहर ही खड़ा था। रुपए मिलते ही रीडर ने पैंट की जेब में रख लिया। एसीबी के अधिकारी झाडिय़ों में छिपकर रीडर पर नजर रखे हुए थे। राकेश के हटते ही एसीबी के अधिकारियों ने रीडर को गिरफ्तार कर पैंट की जेब से चिन्हित नोटों को बरामद किया। नोट एक हजार रुपए के थे।