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Thai Mangur fish: छत्तीसगढ़ में कैंसर बांट रही थाई मांगुर और बिग हेड मछली, पालन और बिक्री पर लगा बैन

Chhattisgarh Health News स्वास्थ्य विभाग और मत्स्य विभाग की चेतावनी के बाद भी लोग सस्ती और तेजी से बढ़ने वाली इन मछलियों को खरीद रहे हैं। अब प्रशासन ने कार्रवाई तेज करने के संकेत दिए हैं।

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भिलाई

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Love Sonkar

May 20, 2026

Thai Mangur fish

कैंसर बांट रही थाई मांगुर और बिग हेड मछली (photo AI)

Thai Mangur fish: छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित थाई मांगुर और बिग हेड मछली लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक इन मछलियों के सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। बावजूद इसके प्रदेश के कई इलाकों में इनका खुलेआम कारोबार जारी है। स्वास्थ्य विभाग और मत्स्य विभाग की चेतावनी के बाद भी लोग सस्ती और तेजी से बढ़ने वाली इन मछलियों को खरीद रहे हैं। मानव स्वास्थ्य और जलीय पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक मानी जा रही विदेशी प्रजाति की थाई मांगुर और बिग हेड मछली पर दुर्ग जिले में तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

Thai Mangur fish: मानव शरीर के लिए गंभीर खतरा

कलेक्टर अभिजीत सिंह के आदेश के बाद अब जिले में इन मछलियों के बीज उत्पादन, पालन, संवर्धन, क्रय-विक्रय और परिवहन पर रोक रहेगी। प्रशासन ने नियम तोडऩे वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। मत्स्य पालन विभाग के वैज्ञानिकों के अनुसार थाई मांगुर (क्लेरियस गैरीपिनस) और बिग हेड (हाइपोफ्थेलमिचिथिस नोबिलिस) दूषित जल, सड़े-गले मांस और हानिकारक अपशिष्टों को खाकर तेजी से बढ़ती हैं। इनके शरीर में बड़ी मात्रा में विषैले तत्व जमा हो जाते हैं, जो मानव शरीर के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक इन मछलियों के लगातार सेवन से कैंसर और गंभीर त्वचा रोग होने की आशंका बढ़ जाती है।

पालन और व्यापार पर सख्त रोक लगाने के निर्देश

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ये विदेशी मांसाहारी प्रजातियां स्थानीय जलाशयों के पारिस्थितिकी तंत्र को तेजी से नुकसान पहुंचा रही हैं। ये तालाबों और नदियों में मौजूद देशी और उन्नत प्रजाति की मछलियों को खा जाती हैं, जिससे जैव विविधता पर प्रतिकूल असर पड़ता है। यही वजह है कि शासन ने इनके पालन और व्यापार पर सख्त रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

उडऩदस्ता करेगा औचक निरीक्षण

प्रतिबंध के प्रभावी पालन के लिए मत्स्य पालन विभाग ने विशेष उडऩदस्ता दल का गठन किया है। यह टीम जिले के मछली बाजारों, तालाबों और परिवहन वाहनों की लगातार निगरानी करेगी। कहीं भी प्रतिबंधित मछलियां मिलने पर पूरा स्टॉक तत्काल जब्त कर नष्ट कर दिया जाएगा।

नियम तोड़ा तो होगी सख्त कार्रवाई

प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले मत्स्य पालकों, व्यवसायियों, होटल संचालकों और बिचौलियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
की जाएगी। छत्तीसगढ़ मत्स्य पालन अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक का कठोर कारावास, 10 हजार रुपए तक जुर्माना या दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं।