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हैै न आश्चर्य : पूरा शहर डेंगू की चपेट में और एक भी मरीज सरकारी अस्पताल में दाखिल नहीं

स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी दावा करते हैं कि जिला अस्पताल में डेंगू के मुफ्त इलाज की पूरी व्यवस्था है। अब तक एक भी मरीज दाखिल नहीं हुआ।

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Bhilai patrika

हैै न आश्चर्य : पूरा शहर डेंगू की चपेट में और एक भी मरीज सरकारी अस्पताल में दाखिल नहीं

भिलाई. सरकारी अस्पतालों में डेंगू के इलाज की अच्छी व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग निजी अस्पतालों में इलाज कराने मजबूर हैं। जहां इलाज में 20 से 50 हजार रुपए तक खर्च हो रहे हैं। परिजन की मानें तो अस्पताल का खर्च और दवा में एक दिन का औसत 6 से 7 हजार रुपए खर्च आ रहा है। इधर स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी दावा करते हैं कि जिला अस्पताल में डेंगू के मुफ्त इलाज की पूरी व्यवस्था है। अब तक एक भी मरीज दाखिल नहीं हुआ। जबकि पूरा शहर डेंगू की चपेट में है खासतौर पर टाउनशिप ।

डेंगू के टेस्ट का शहर के लैब में अलग-अलग चार्ज
डेंगू के टेस्ट का शहर के लैब में अलग-अलग चार्ज है। रैपिड टेस्ट के लिए ही मरीजों को एक हजार रुपए और एलाइजा टेस्ट के लिए 1200 सौ रुपए देने पड़ रहे हैं। इधर शहर के बड़े पैथोलॉजी सेंटर में इसी टेस्ट के 1800 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। जबकि सरकारी अस्पताल में इसका दाम काफी कम है। पर यहां की रिपोर्ट पर लोगों को भरोसा ही नहीं है।

4 दिन में डेंगू के इलाज पर 46 हजार खर्च आया
हाल ही में सेक्टर 9 अस्पताल में एक नॉन बीएसपी परिवार ने अपने बेटे के इलाज में 42 हजार रुपए खर्च किए। उसे डेंगू हुआ था और वह 7 दिन भर्ती था। वहीं बीएम शाह अस्पताल में दाखिल खुर्सीपार के एक परिवार को 4 दिन में अपने बच्चे का इलाज करने 21 हजार से ज्यादा का बिल चुकाना पड़ा। स्पर्श अस्पताल में भी छावनी के एक परिवार के तीन बच्चों का चार दिनों तक इलाज चला और उनका बिल 46 हजार रुपए बना। इस पर अगर किसी मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाई गई है तो उसके लिए खून का इंतजाम भी परिजन ने ही किया। सेक्टर-09 हॉस्पिटल में बीएसपी और नॉन बीएसपी के मरीजों में भेदभाव के कारण लोग मजबूरी में निजी अस्पतालों में उपचार कराने विवश है।