2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

CG News: 72 लाख से बना हाईस्कूल भवन में बनवा दिए शौचालय, दो घंटे पहले ही शिक्षकों को मिल रही छुट्टी

CG News: स्कूल का नवीन भवन बनने के बाद 12 साल से बंद है। इस बीच जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने इसमें करीब 3 लाख खर्च कर नया शौचालय बनवा दिया है।

2 min read
Google source verification

भिलाई

image

Love Sonkar

Apr 15, 2025

CG News: 72 लाख से बना हाईस्कूल भवन में बनवा दिए शौचालय, दो घंटे पहले ही शिक्षकों को मिल रही छुट्टी

CG News: बोरसी में जिला प्रशासन ने हाईस्कूल के बच्चों के लिए साल 2011-12 के दौरान सवा दो एकड़ में आधा दर्जन से अधिक कमरों का भवन तैयार किया। इसके एक कोने में शौचालय भी बनवाया गया। पुराने भवन से हाईस्कूल के बच्चों को नवीन भवन में शिफ्ट किया जाना था। 12 साल हो गए लेकिन हाईस्कूल को शिफ्ट नहीं किया गया। यह भवन बिना उपयोग जर्जर होने लगा है।

यह भी पढ़ें: Teachers Protest: पुलिस ने कपड़े फाड़े, किया बैड टच… बर्खास्त B.Ed शिक्षकों ने लगाए आरोप, देखे प्रदर्शन की तस्वीरें

बंद स्कूल भवन में बनवा दिए शौचालय

बोरसी में स्कूल का नवीन भवन बनने के बाद 12 साल से बंद है। इस बीच जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने इसमें करीब 3 लाख खर्च कर नया शौचालय बनवा दिया है। जिस भवन में पढ़ने के लिए बच्चे कभी आए ही नहीं, वहां नया शौचालय बनवाना भी अटपटा लगता है।

प्राचार्य और डीईओ भी जिम्मेदार

नवीन भवन में स्कूल शिट नहीं किया गया। इसके लिए स्कूल के प्राचार्य और तात्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग भी जिमेदार हैं। स्कूल का नवीन भवन बनवाने के बाद उसमें हाईस्कूल शिट किया जाना था। इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। सवाल उठता है कि आखिर शौचालय क्यों बनावाया गया और किसका प्रस्ताव था।

नए भवन में सुबह 10 से शाम 4 बजे तक क्लास लगाया जाता है। इस तरह से बड़े बच्चों को 6 घंटे तक पढ़ाया जाता। वहीं पुराने भवन में मिडिल और हाई स्कूल के बच्चों को मिलाकर पढ़ा रहे हैं। इससे यहां सुबह 7 से 11.30 बजे तक ही पढ़ाना होता है। इस तरह से 4.30 घंटे ही पढ़ाना पढ़ रहा है। दो घंटे पहले ही शिक्षकों को छुट्टी मिल जा रही है। शिक्षकों को जहां दो घंटे पहले छुट्टी मिलती रही, वहीं बच्चों को हर दिन दो घंटे का नुकसान होता रहा।

अगर नवीन भवन में शिट होते, तो दो घंटे अधिक पढ़ाई होती। हर स्कूल के मरमत के नाम पर साल में एक बार करीब 1 लाख रुपए आता है। 12 साल में दोनों स्कूल के नाम पर अलग-अलग रकम आया था, तो उसका उपयोग कहां किया गया। मरमत किया जा रहा था, तब कैसे स्कूल के दरवाजे टूट रहे हैं। भवन का रंग-रोगन तक नहीं किया गया है। अब यह भवन समाज कंटकों का अड्डा बन गया है। बोरसी के नवीन स्कूल भवन को लेकर कलेक्टर दुर्ग स्तर पर कुछ तैयारी चल रही है। इसके संबंध में विस्तार से जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग ही दे सकते हैं।