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गर्मी छुट्टी में बहन के घर आईं नाबालिग, दोस्त के साथ कार में जा रही थी और दुष्कर्म का शिकार हो गई

सीजी बोर्ड की 10 वीं की टॉपर एक नाबालिग छात्रा दुष्कर्म की शिकार हो गई। यह घटना 19 मई की रात ग्राम मुरमुंदा (नंदिनी) की है।

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गर्मी छुट्टी में बहन के घर आईं नाबालिग, दोस्त के साथ कार में जा रही थी और दुष्कर्म का शिकार हो गई

भिलाई. सीजी बोर्ड की दसवीं की टॉपर एक नाबालिग छात्रा दुष्कर्म की शिकार हो गई। आरोपी युवक ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर उसका अपहरण किया। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी समेत उसके दो दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना १९ मई की रात ग्राम मुरमुंदा (नंदिनी) की है। घटना के १० दिन बाद आरोपियों की गिरफ्तारी कर पुलिस ने मामले का खुलासा किया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा ३६३, ३६६, ३७६, ३४,५ (ख), ६ पास्को एक्ट के तहत जुर्म दर्ज किया है। तीनों आरोपियों को मंगलवार को न्यायिक अभिरक्षा जेल भेज दिया।

आरोपी विनोद भी पीडि़त छात्रा के गांव का ही
पुलिस ने बताया कि 17 साल की पीडि़त छात्रा बिलासपुर संभाग की रहने वाली है। वह गर्मी की छुट्टी में अपनी बड़ी बहन के घर ग्राम मुरमुंदा आई थी। आरोपी विनोद राजपूत (२५) भी पीडि़त छात्रा के गांव का ही रहने वाला है। वह दो साल से छात्रा की पीछे पड़ा हुआ था। छात्रा को प्रलोभन देकर अपने जाल में फंसा लिया था। जब पीडि़ता मुरमुंदा आई तब आरोपी विनोद भी अपने दो साथी आरोपी शैलेन्द्र कुमार पटेल (२२) और रवीन्द्र कुमार यादव (२४) के साथ १९ मई की रात करीब सात बजे मुरमुंदा आया। आरोपी ने पीडि़ता को उसकी बहन के घर से बाहर बुलाया और बहला फुसला कर अपनी कार में बैठा लिया।

कार में किया बालात्कार
आरोपी उसे कार में बैठाकर अपने गांव ले गया। पुलिस ने बताया कि कोरबा के पहले एक गांव के पास अपने दोस्तों शैलेश और रवींद्र को उतार दिया। आगे जाकर रास्ते में कार खड़ी की और छात्रा के साथ बालात्कार किया। फिर उसे उसके घर के पास ले जाकर छोड़ दिया।

तीनों आरोपी गिरफ्तार
नंदिनी टीआई चेतन साहू ने बताया कि नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। तीनों के खिलाफ जुर्म दर्ज न्यायालय में पेश किया गया। जहां से तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।

मामला प्रेम प्रसंग का
पुलिस ने नाबालिग की शिकायत पर भले ही अपहरण का मामला दर्ज कर लिया है परंतु मामला प्रेम प्रसंग का ही लगता है। नाबालिग आरोपी लड़के को पहचानती थी तभी कार में अपनी मर्जी से बैठी। नंदिनी में अपहरण होने पर रास्तेभर नाबालिग ने बचाने की आवाज क्यों नहीं लगाई। यदि वह कार के भीतर से जोर-जोर से चिल्लाती तो किसी न किसी की नजर उस पर पड़ती? इसी तरह गांव के पहले दो दोस्त कार से उतरे तब भी वह भाग सकता थी? उन्होंने ऐसा नहीं किया?