
इस कर्मचारी ने रिटायरमेंट और अपने जन्मदिन पर ही क्यों मांगी इच्छा मृत्यु, पढ़ें खबर
दुर्ग. गबन के मामले में तीन साल जेल में रहा। बाद में न्यायालय से दोषमुक्त हो गया। उसके बाद दो साल से नौकरी में बहाली के लिए चक्कर लगा रहा है। नौकरी की तिथि के हिसाब से 30 मई 2018 को उनका सेवनिवृत्ति का दिन है। आखिर हताश होकर नगर निगम भिलाई के मोहर्रिर रामकृष्ण साठवाने (६२ वर्ष) ने कलक्टर के सामने इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी। इस पर मदद करना तो दूर अधिकारियों ने उसे खरी खोटी सुना दी। रामकृष्ण ने बताया कि उसका बेटा बेरोजगार है। कैंसर पीडि़त पत्नी के इलाज कराने के लिए पैसे नहीं है। माली हालत का हवाला देने पर भी अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया।
आज रिटयरमेंट का दिन और जन्मदिन भी
दो साल निगम कार्यालय का चक्कर लगाने के बाद भी उसे नौकरी वापस नहीं मिली। अधिकारी घुमाते रहे। कभी फाइल खोजने के नाम पर तो कभी शासन से मार्गदर्शन लेने के नाम पर। रामकृष्ण ३० मई को ६२ वर्ष की आयु पूर्ण कर रहा है। इसी दिन उसका जन्म दिन भी है। इसलिए अब उसे इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है।
दो साल पहले न्यायालय ने आरोप से दोषमुक्त किया
दो साल पहले रामकृष्ण को न्यायालय ने दोष मुक्त किया है। न्यायालय के फैसले की कापी लेकर वह नौकरी की आस में भिलाई नगर पालिक निगम का चक्कर लगाता रहा। अधिकारियों ने उसका मजाक बना दिया। स्थिति ऐसी आ गई कि आज उसका रिटायरमेंट का दिन है। आधी उम्र लड़ाई लडऩे के बाद फैसला पक्ष आया। उम्मीद थी कि नौकरी में बहाली हो जाएगी। माथे पर लगा कंलक मिट गया। अब बचे हुए दिन की नौकरी करेगा और दो साल बाद सेवानिवृत्त होकर आराम का जीनव व्यतीत करेगा। अब वह ठगा महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि वह व्यवस्था से त्रस्त है, और इसलिए कलक्टर के सामने इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी।
पांच लाख रुपए गबन करने का आरोप था
रामकृष्ण साठवाने विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) में १९८२ से नौकरी की शुरूवात की। साडा के भंग होने के बाद नगर पालिक निगम में मोहर्रिर बना। खुर्सीपार क्षेत्र से टैक्स वसूली करता था। वर्ष २००४ में उस पर अमानत में खयानत करने का आरोप लगा। 5 लाख गबन करने के आरोप में तत्कालीन निगम आयुक्त निरजंन दास के निर्देश पर राजस्व अधिकारी टीआर यदु ने सुपेला थाना में उसके खिलाफ अपराध दर्ज कराया। पुलिस ने गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया। उसे न्यायालय से जमानत नहीं मिली। तीन साल बाद निचली अदालत ने उसे दोषी करार दिया और जितने दिन जेल में रहा उतने ही दिन की सजा सुनाई। इस तरह सजा जेल में रहे दिन में समायोजित हो गई और वह रिहा हो गया।
2016 में हुआ दोषमुक्त- 2008 में निचली अदालत के फैसले को अपर कोर्ट में चुनाती दी। अपर कोर्ट ने दोषमुक्तकर दिया। जिला कोर्ट के तत्कालीन अपर न्यायाधीश राजेश कुमार श्रीवास्तव ने २४ मई २०१६ को फैसला सुनाया।
मार्गदर्शन दिया- आवेदन पर निगम ने शासन को मार्गदर्शन के लिए पत्र लिखा था। उप सचिव आर एक्का ने आयुक्त निगम भिलाई को १९ जनवरी २०१८ को पत्र लिखा कि विधिक सलाह लेकर प्रकरण का त्वरित निराकरण करें।
अफसरों ने बेटे को डांटा - इच्छा मृत्यु की अनुमति लेने वह अपने बेटे के साथ जनदर्शन में पहुंचा था। अधिकारियों ने उसे वहां खरी खोटी सुनाई। बेटे को भी यह कहते हुए डांटा गया कि पिता की नौकरी का पैसा हड़पने के लिए पिता को मौत के लिए उकसा रहा है।
Published on:
30 May 2018 09:52 am
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